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RajKumar26
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विचारण न्यायालय द्वारा अपील निर्णय एवं दंड दिनांक 06 सितंबर, 2013 द्वारा अपीलार्थी को धारा 338 भारतीय दंड संहिता तथा धारा 3/181 मोटरयान अधिनियम के आरोप में दोषसिद्ध किया जाकर उपरोक्तानुसार दंडित किया गया है। अर्थदंड की राशि विचारण न्यायालय में जमा कराई जा चुकी है। अपीलार्थी की ओर से यह आपराधिक अपील इस आधार पर प्रस्तुत की गई है कि विचारण न्यायालय द्वारा अपीलार्थी को दोषसिद्ध कर दंडित करने में गंभीर वैधानिक त्रुटि की गई है। दिनांक 11 जुलाई, 2007 की घटना में फरियादी तथा अन्य साक्षीगण के कथनों द्वारा सिद्ध नहीं होने, वाहन के नंबर के संबंध में कोई साक्ष्य प्रकट नहीं होने तथा अभियोजन के साक्षीगण के कथनों में गंभीर विरोधाभास होने के बावजूद अपीलार्थी को दोषसिद्ध कर दंडित करने में गंभीर वैधानिक त्रुटि की गई है। उक्त आधार पर विचारण न्यायालय द्वारा घोषित अपील अवधि निर्णय एवं दंड की आदेश दिनांक 06 सितंबर, 2013 अपास्त की जाकर अपीलार्थी को उक्त प्रकरण में अधिरोपित आरोप से दोषमुक्त करने की प्रार्थना की गई है। जहां तक दंड देने का प्रश्न है, प्रकरण की घटना वर्ष 2007 की होकर लगभग दस वर्ष पुरानी है। उसके विरुद्ध कोई पूर्व दोषसिद्धि अभिलेख पर प्रकट नहीं होती है। वह ग्रामीण कृषक है फरियादी द्वारा अपनी एक वर्षीय बालिका को साइकिल की सीट पर बैठाकर साइकिल चलाना उसकी स्वयं की लापरवाही को भी इंगित करता है। अत: आरोपी को कारावास से दंडित किया जाना न्यायसंगत प्रतीत नहीं होता है, उसे समुचित अर्थदंड से दंडित किया जाकर आवेदकगण को धारा 357 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत क्षतिपूर्ति दिलवाया जाना न्यायसंगत प्रतीत होता है। अत: विचारण न्यायालय द्वारा अपीलार्थी को कारावास से दंडित करने में विधि एवं तथ्यों संबंधी गंभीर त्रुटि किया जाना प्रकट होता है।
प्रकरण में आज्ञप्तिधारी की ओर से उसकी क्षतिपूर्ति की राशि के भुगतान में काटे गए आयकर में राहत राशि की कार्यवाही हेतु उसके संबंधित कंपनी में उसका पेनकार्ड नंबर दर्ज करवाए जाने हेतु प्रार्थना की गई है। इस संबंध में निर्णीत ऋणी शाखा प्रबंधक, बीमा कंपनी को आवश्यक ज्ञापन प्रेषित कर आवेदक शंकर दयाल की कंपनी में पेनकार्ड नंबर जोड़े जाने हेतु निर्देशित किया जावे। तदनुसार कार्यवाही उपरांत परिणाम अंकित कर प्रकरण अभिलेखागार भेजा जावे।