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shahidman009238
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पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी द्वारा धारा 173 के अधीन यह अभिकथित करते हुए यह रिपोर्ट की गई है कि इसके द्वारा ऐसे अपराध सें भिन्न कोई तत्समय विधि के अधीन मृत्यु या आजीवन या 7 वर्ष से अधिक की अवधि के कारावास के दंड का उपबंध है या मजिस्ट्रेट ने परिवाद के संज्ञान ले लिया है जो उस अपराध से भिन्न है जिसके लिए तत्सयम प्रवृत्त विधि के अधीन आजीवन कारावास या 7 वर्ष से अधिक की अवधि के लिए दंड का उपबंध है और धारा 200 के अधीन परिवादी और साक्षी की परिभाषा करने के पश्चात् धारा 204 के अधीन आदेशिका जारी की है। किंतु यह अध्याय वहां लागू नहीं होगा जहां ऐसा अपराध-सामाजिक आर्थिक दशा को प्रभावित करता है या किसी महिला अथवा 14 वर्ष की आयु से कम के बालक के विरुद्ध किया गया है। उपधारा 1 के प्रयोजनों के लिए, केंद्रीय सरकार अधिसूचना द्वारा तत्सयम प्रवृत्त विधि के अधीन वे अपराध अवधारित करें जो देश की सामाजिक दशा को प्रभावित करते हैं। किसी अपराध का सौदा अभिवाक् के लिए उस न्यायालय में आवेदन फाइल कर सकेगा जिसमें ऐसे अपराध का विचारण लंबित है। उपधारा 1 के अधीन आवेदन में उस मामले का संक्षिप्त वर्णन होगा जिसके संबंध में आवेदन फाइल किया गया है। और उसमें उस का वर्णन भी होगा जिसके उसके साथ अभियुक्त का शपथ पत्र होगा जिसमें यह कथित होगा की उसने विधि के अधीन उस उपधारा के लिए उपबंधित दंड की प्रकृति और सीमा को समझने के पश्चात् अपने मामले में स्वेच्छा से सौदा अभिवाक् दाखिल किया है और उसे किसी न्यायालय ने इससे पूर्व किसी ऐसे मामले में जिसमें उसे उसी अपराध से आरोपी किया गया था कि यह कि सिद्धदोष नहीं ठहराया गया है। न्यायालय उपधारा 1 के अधीन आवेदन प्राप्त होने के पश्चात् यथास्थिति लोक अभियोजक या परिवादी या साथ ही मामले में नियत तारीख को हाजिर होने के लिए सूचना जारी करेगा जहां धारा 265 का एक मामले का कोई संतोषप्रद निपटारा तैयार किया गया है वहां न्यायालय ऐसे निपटारे की रिपोर्ट तैयार करेगा। दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 2 में भी अपराध की परिभाषा अंतर्विष्ट है, जो निम्नलिखित प्रकार से है जो लोभ या अभिप्रेत है