words per minute
16
shahidman009238
00:00
Speed
विद्वान विचारण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत आवेदन अंतर्गत आदेश 22 नियम 03 सहपठित धारा 151 सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 दिनांकित में अभियोगी परिवादी की उक्त दिनांक को मृत्यु होना अभिवचनित किया गया है। पुनरीक्षणकर्तागण द्वारा विचारण न्यायालय के समक्ष परिवादी की मृत्यु के संबंध में मृत्यु प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया है किंतु परिवादी की मृत्यु की तत्परता को शपथ पत्र द्वारा सत्यापित किया गया है। पुनरीक्षण लंबित रहने के दौरान पुनरीक्षणकर्तागण की ओर से परिवादी का मृत्यु प्रमाण पत्र जो योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा जारी किया गया है।
पुनरीक्षणकर्ता की विद्वान विचारण न्यायालय के समक्ष मुख्य आपत्ति यह रही है कि पुनरीक्षणकर्तागण की ओर से सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के आदेश 22 नियम 03 के अंतर्गत प्रस्तुत आवेदन दांडिक प्रकरण पोषनीय नहीं है क्योंकि दांडिक विधि में सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधान प्रयोज्य नहीं होते हैं। इस संबंध में न्यायदृष्टांत एवं अन्य केस विरुद्ध सिविल अपील क्रमांक 135/18 में पारित निर्णय उक्त दिनांक को माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा धारा 138 परक्राम्य लिखित अधिनियम, 1881 की कार्यवाही की प्रक्रति को आपराधिक होना आपराधिक किया गया है। माननीय उच्चतम न्यायालय ने परक्राम्य लिखित अधिनियम, 1881 कारित अपराध के संबंध में यह अभिनिर्धारित किया गया है अधिनियम 1881 के अंतर्गत पभि अपराध भारतीय दंड संहिता के अन्य विधि के समतुल्य नहीं माना जा सकता है। अधिनिमय, 1881 के अंतर्गत कारित अपराध प्रकृति सिविल रंग होता है जिसे अपराध का वस्त्र पहना दिया जाता है। इस प्रकार अधिनियम, 1881 के अंतर्गत परिभाषित अपराध को विशुद्ध आपराधिक प्रकृति का नहीं होना माना जा सकता है। कहीं न कहीं ऐसा अपराध सिविल रंग की कोटि में भी आता है। अत: यह नहीं कहा जा सकता है कि सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के प्रक्रियात्मक प्रावधान ऐसे प्रकरण में प्रयोज्य नहीं है जहां क परिवादी की मृत्यु के उपरांत अधिनियम, 1881 के अंतर्गत परिवाद के संचालन का प्रश्न है तो इस संबंध में माननीय उच्चतम न्यायालय ने यह अभिनिर्धारित किया है कि परिवादी द्वारा प्राधिकृत मुख्तयारनामा अथवा परिवादी के विरुद्ध उत्तराधिकारी द्वारा परिवादी की मृत्यु हो जाने की दशा में अधिनियम, 1881 की धारा 138 के निबंधनों के अंतर्गत परिवाद प्रस्तुत किया जा सकता है।