words per minute
25
Ghulam_Mustafa
00:00
Speed
प्रकरण में इस बिंदु पर कोई विवाद नहीं है कि अपीलार्थी उत्तरवादी के उपक्रम में चालक के पद पर पदस्थ था और उक्त दिनांक को सेवा से सेवानिवृत्त हो गया था, पश्चात् में उसके आवेदन पर उपक्रम द्वारा आवंटित मकान 13/75 उसे पुन: उक्त दिनांक से उक्त दिनांक तक की अवधि के लिए अनुबंध निष्पादित होने पर आवंटित किया गया जिसकी अवधि समाप्त होने के पश्चात् भी अपीलार्थी ने उक्त मकान को खाली नहीं किया और इस पर उक्त दिनांक को उत्तरवादी द्वारा उसे सूचना पत्र देकर मकान का आवंटन निरस्त कर रिक्त आधिपत्य एवं बकाया किराया राशि जमा करने के लिए सूचना पत्र देकर मकान का रिक्त आधिपत्य एवं किराया चाहा गया। सूचना पत्र पाकर भी जब अपीलार्थी ने मकान का रिक्त आधिपत्य नहीं सौंपा, इस पर उत्तरवादी द्वारा अप्राधिकृत अधिभोगियों की बेदखली अधिनियम, 1971 के अंतर्गत संपदा अधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर रिक्त आधिपत्य एवं बकाया किराया की मांग की। आज इस संसार में प्रत्येक व्यक्ति के मसि्तष्क में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के विचार आते रहते हैं। यही विचार हमारे जीवन में सकारात्मकता अथवा नकारात्मकता लाते हैं। इसी प्रकार हमारे घर के अंदर भी नकारात्मक और सकारात्मक ऊर्जा क आना-जाना लगा रहता है जब घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तो घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है इसके विपरीत जब नकारात्मक ऊर्जा का घर में प्रवेश हो जाता है और अनेक प्रकार के कष्ट आने शुरू हो जाते हैं जिससे हमारे जीवन में कई प्रकार की समस्याएं आना प्रारंभ हो जाती हैं। जब विपरीत कार्य करने लगता है।
अभियोजन साक्षी जहां तक साक्षी के कथन लेखबद्धन् न कराए जाने के संबंध में हैं वहां आपराधिक प्रकरणों में गवाहों की संख्या महत्वपूर्ण नहीं होती बल्कि गवाहों की गुणवत्ता महत्वपूर्ण होती है। यदि अभिलेख पर एक मात्र विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध हो तब ऐसे साक्ष्य के आधार पर दोषसिद्धि आधारित की जा सकती है। अभियुक्तगण के अधिवक्ता ने व्यक्त किया है कि अभियुक्तगण प्रथम अपराधी हैं, अभियुक्तगण के विरूद्ध पूर्व में कोई दोषसिद्धि नहीं है परंतु जिस प्रकार अभियुक्तगण ने फरियादी के घर में घुसकर फरियादी के साथ मारपीट की व दांतों से काटा जिसके फलस्वरूप फरियादी के सिर व शरीर के अन्य अंग पर चोट आई।