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Ghulam_Mustafa
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अभियुक्त के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 279, 337 एवं मोटरयान अधिनियम की धारा 13/181 के तहत दंडनीय इस आशय के अपराध का आरोप है कि उसने उक्त दिनांक को 08 बजे के मध्य स्कूल के सामने आरक्षी केंद्र कोतवाली क्षेत्रातंर्गत वाहन को उतावलेपन या उपेक्षापूर्ण रीति से चलाकर फरियादी को टक्कर मारकरउसे उपहति कारित की एवं उक्त वाहन को बिना बीमा एवं लायसेंस के लोकमार्ग पर चलाया तथा अभियुक्त के विरुद्ध मोटरयान अधिनियम की धारा 15/180 के तहत दंडनीयइस आशय के अपराध का आरोप है कि उसने वाहन का पंजीकृत स्वामी होते हुए और यह जानतेहुए कि उक्त वाहन बीमित नहीं हैं और अभियुक्त के पास वाहन चालान की अनुज्ञप्तिनहीं है इसके बाद भी अभियुक्त को उक्त उक्त वाहन को उक्त दिनांक को लगभग 08 बजे स्कूल के सामने लोकमार्गपर चलाने के लिए बदया।
अभियोजन कथानक संक्षेप में इस प्रकार है कि फरियादीको उक्त दिनांक शाम 08 बजे अपना ठेला रखकर घर जा रहा था तभी एक वाहन चालक बाजार की तरफ से अपने वाहन को तेजी व लापरवाही से चलाकर लाया और उसमें टक्कर मार दी, जिससे उसके बांयी तरफ पसली व बांयी जांघ में मूंदी चोट आयी। मौके पर उसका लड़का साथ में था जिसने वाहन का नंबर देखा था। फरियादीद्वारा उक्त घटना की क्षेत्राधिकारिता वाले आरक्षी केंद्र कोतवाली पर अभियुक्त के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट लेख करने पर फरियादी की रिपोर्ट पर से आरक्षी केंद्र कोतवाली पर अपराध क्रमांक32/20 पर भारतीय दंड संहिता कीधारा 279, 337 के तहत दंडनीयअपराध पंजीबद्धकर अनुसंधान आरंभ कियागया है तथा अनुसंधान उपरांत अभियुक्त के विरुद्ध यह अभियोग पत्र उक्त धाराओं के तहत दंडनीय अपराध के विचारण हेतु प्रस्तुत कियागया है।
प्रकरण में अभिग्रहित वाहन की अ्रंतरिम सुपुदर्गी संबंधी कोई दस्तावेज या आदेश अभिलेख पर उपलब्ध नहीं है। अभिग्रहित वाहन की अंतरिम सुपदर्गी में होने की दशा में अपील अवधि उपरांत अपील न होने की दशा में अंतरिम सुपुदर्गीनामा भारमुक्त समझा जावे तथा अभिग्रहित वाहन अंतरिम सुपुदर्गी पर न होने की दशा में अपील अवधि उपरांत अपील न होने की दशा में वाहन के पंजीकृत स्वामी को सुपुदर्गी पर दिया जावे। अपील होने पर माननीय अपीलीय न्यायालय के आदेशानु1सार अभिग्रहित संपत्त्ि का निराकरण किया जावे।