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Ghulam_Mustafa
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अभियुक्तगण की ओर से प्रस्तुत प्रथम नियमित जमानत आवेदन पत्र धारा 439 दण्ड प्रक्रिया संहिता पर उभयपक्ष को सुना गया आवेदन पत्र के साथ आवेदक के पिता का शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया है कि आवेदक की ओर से यह प्रथम नियमित प्रतिभूति आवेदन पत्र के संबंध में शपथ पत्र प्रस्तुत करते हुए आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया है। अत: उक्त आधार पर आवेदकगण की ओर से प्रस्तुत यह प्रथम प्रतिभूति आवेदन पत्र होना प्रकट होता है तथा अन्य कोई आवेदन लंबित अथवा निराकृत होना भी प्रकट नहीं होता है।
अभियुक्तगण को जमानत का लाभ दिये जाने का निवेदन इस आधार पर किया गया है कि आरोपिता अपराध से अभियुक्तगण का कोई संबंध नहीं है। उन्हें उक्त अपराध में झूठा फंसाया गया है। वे निर्दोष है। प्रकरण के सहअभियुक्तगण को इसी न्यायालय द्वारा आवेदन को पारित आदेशानुसार जमानत पर मुक्त किया जा चुका है। अभियुक्तगण का अपराध भी उक्त अभियुक्त के समान ही होना बताया गया है। ऐसी स्थिति में इस आवेदक को भी जमानत का लाभ दिया जाना न्यायहित में आवश्यक है। अभियुक्तगण को जमानत पर मुक्त किये जाने पर वे न्यायालय द्वारा दिये गये समस्त आदेशों का पूर्णरूप से परिपालन करेंगे, नियम पेशी तारीखों पर नियमित रूप से उपस्थित होते रहेंगे तथा अभियोजन साक्षियों को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं करेंगे। इस हेतु वे न्यायालय के आदेशानुसार अपनी योग्य राशि की प्रतिभूति बंधपत्र प्रस्तुत करने हेतु तत्पर है।
अपर लोक अभियोजक ने इस प्रथम जमानत आवेदन पत्र के संबंध में मौखिक आपत्ति की तथा प्रतिभूति आवेदन पत्र निरस्त किये जाने का निवेदन किया। आरक्षी केंद्र मोहनपुरा की ओर से भी जमानत आवेदन के संबंध में केस डायरी प्रस्तुत करते हुए व्यक्त किया है कि आवेदकगण आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। जमानत का लाभ दिये जाने की दशा में फरार होने की संभावना है तथा फरियादी एवं साक्षियों को डराएंगे धमकाएंगे। अत: जमानत आवेदन निरस्त किये जाने का निवेदन किया गया है। अभियुक्तगण अभियोजन साक्ष्य को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेंगे। इसी प्रकार का अन्य कोई अपराध कारित नहीं करेंगे। तो जमानत पर मुक्त किया जावे, आदेश की एक प्रति के साथ संबंधित न्यायालय से प्राप्त रिमाण्ड प्रपत्र वापस किये जावें।