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Aditya_Patel
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सिविल मामलों में विवाद उत्पन्न होने के बाद से निर्णय होने तक के प्रक्रम को जानना आवश्यक होता है। यदि हम इस प्रक्रम को जानते हैं, तो निर्णय पारित करना बहुत आसान हो जाता है। सिविल मामला किसी प्रकार के विवाद होने पर जो सिविल प्रकृति का है, तो उसके संबंध में आवश्यक अनुतोष प्राप्त करने के लिए सक्षम न्यायालय के समक्ष वाद प्रस्तुत करना होता है। सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 15 से 20 तक में उन न्यायालयों का वर्णन किया गया है, जहां पर वाद सहित संस्थित किया जाता है। यह तथ्य भी बहुत महत्वपूर्ण है कि वाद क्षेत्राधिकार वाले न्यायालय में ही दाखिल किए जाएं। सक्षम न्यायालय के चयन के बाद वादी द्वारा न्यायालय में वाद पत्र प्रस्तुत किया जाता है। वादी की तरफ से वाद पत्र प्रस्तुत किए जाने के उपरांत प्रतिवादी को नोटिस जारी किया जाता है, जिस पर प्रतिवादी न्यायालय में उपस्थित हो करके अपना जवाब प्रस्तुत करता है, जो प्रतिवाद पत्र कहलाता है। न्यायालय में प्रतिवाद पत्र प्रस्तुत होने के बाद उभयपक्षों के अभिवचनों के आधार पर विवाद्यक तैयार किए जाते हैं। विवाद्यक पक्षकारों के मध्य मूल विवाद का विषय होता है जिस पर न्यायालय द्वारा निर्णय दिया जाना होता है। विवाद्यक के रचना के बाद क्रमश: वादी व प्रतिवादी द्वारा अपने-अपने मौखिक व दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए जाते हैं। भारत जैसे विशाल अर्थव्यवस्था में बहुत तेज आर्थिक बदलावों का दिखना आश्चर्यजनक नहीं है। महंगाई की मार भी लगातार बनी हुई है, तो रूपये का मूल्य सार्वकालिक निचले स्तर पर है हालांकि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि दुनिया की अन्य मुद्राओं की तुलना में अब भी रूपया बेहतर स्थिति में है। साथ ही वह यह भी मान रही हैं कि हम कुछ ही हद तक बेहतर स्थिति में हैं, क्योंकि हमने अपनी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से खोल दिया है, इसलिए वैश्विक अर्थव्यवस्था का असर यहां आये दिन होता है। भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गर्वनर माइकल डी. पात्रा कह तो रहे हैं कि आरबीआई रूपये में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होने देगा, लेकिन सच यह है कि इसके लिए सरकार को भी ठोस प्रयास करने पड़ेंगे। रूपया पहली बार 79 के पार पहुंचा है तो यह कोई प्रशंसनीय बात नहीं है।