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Pramod_raj
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यदि ता रे रे के के सं संकु कु चि त हो ते ते हु ये ये कें कें द्र क का द्र व्य मा न सू सूर्य र्य के के द्र व्य मा न से से ती न गु गुणा हो तो उसकी सतह पर गु गुरु त्वा कर्ष र्षण इतना अधि क हो जा ता है है कि पला यन वे वेग प्र का श गति से से भी अधि क हो जा ता है है। इसका अर्थ र्थ यह है है कि इस पिं पिंड के के गु गुरु त्वा कर्ष र्षण से से कु कु छ भी नहीं हीं बच सकता है है, प्र का श भी नहीं हीं। इस का रण यह पिं पिंड का ला हो ता है है। श्या म वि वर के के आसपा स का वह क्षे क्षेत्र जहां हां परपला यन वे वेग प्र का श गति के के बरा बर हो घटना क्षि ति ज कहला ता है है। इस सी मा के के अं अंदर जो भी कु कु छ घटि त हो ता है है वह हमे मेशा के के लि ये ये अदृ श्य हो ता है है।अब हम जा नते ते हैं हैं कि श्या म वि वर कै कै से से बनते ते है है। अब हम जा नते ते हैं हैं कि इनका गु गुरु त्वा कर्ष र्षण का प्र भा व इतना अधि क क्यों क्यों हो ता है है। गु गुरु त्वा कर्ष र्षण दो ची जों जों पर नि र्भ र्भर करता है है, पिं पिंड का द्र व्य मा न तथा उस पिं पिंड से से दू दू री । ता रे रे का कें कें द्र क का द्र व्य मा न स्थि र है है, बस वह सं संकु कु चि त हु आ है है। द्र व्य मा न स्थि र है है,तो इसका अर्थ र्थ यह है है कि उसका गु गुरु त्वा कर्ष र्षण भी स्थि र है है। ले लेकि न सं संकु कु चि त कें कें द्र क का आका र कम हो गया है है, अर्था र्थात को ई अन्य पिं पिंड उस सं संकु कु चि तकें कें द्र क के के अधि क समी प जा सकता है है। को ई अन्य पिं पिंड उस सं संकु कु चि त कें कें द्र क के के जि तने ने ज्या दा समी प जा ये येगा उस पर सं संकु कु चि त कें कें द्र का गु गुरु त्वा कर्ष र्षणउतना अधि क प्र भा वी हो गा । और एक दू दू री ऐसी भी आये येगी जब उसका गु गुरु त्वा कर्ष र्षण इतना प्र भा वी हो जा ये येगा कि वह पिं पिंड सं संकु कु चि त कें कें द्र की चपे पेट में में आ जा ये येगा । श्या म वि वर के के मा मले ले में में ऐसा हो ता है है कि सं संकु कु चि त कें कें द्र इतना ज्या दा सं संकु कु चि त हो जा ता है है कि घटना क्षि ति ज की सी मा के के अं अंदर प्र का शकण भी श्या म वि वर के के गु गुरु त्वा कर्ष र्षण की चपे पेट में में आ जा ते ते हैं हैं। श्या म वि वर का द्र व्य मा न मा यने ने नही रखता है है, उस द्र व्य मा न का एक छो टे टे से से हि स्से स्से में में सं संकु कु चि त हो ना महत्व पू पूर्ण र्ण है है।