words per minute
13
Ashish_Rajpoot
00:00
Speed
सभापति महोदय, आवेदक अधिवक्ता के द्वारा उसकी हाजिरी माफी बाबत् आवेदन पत्र अंतर्गत धारा 317 दंड प्रक्रिया संहिता जब न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करके निवेदन और तर्क किया गया कि अभियुक्त किसी अन्य कारण से शहर के बाहर है वह न्यायालय में अपने प्रकरण की पैरवी के लिए उपस्थित नहीं हो सकेगा एवं उसकी ओर से उसके अधिवक्ता की उपस्थिति दर्ज की जावे। अगली नियत तिथि में आवेदक/अभियुक्त आवश्यक रूप से प्रकरण की पैरवी के लिए उपस्थित हो जाएगा। अभियोजन अधिकारी के द्वारा इस आवेदन पत्र का विरोध प्रकट करते हुए न्यायाधीश महोदय से तर्क किया गया कि यदि अभियुक्त/आवेदक को बार-बार हाजिरी माफी प्रदान की जाएगी तो वह न्यायालय की कार्यवाही में ऐसे ही विलंब कारित करता रहेगा। पिछले माह भी अभियुक्त न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ था और उसके अधिवक्ता के द्वारा उसकी उपस्थिति क्षम्य बाबत् आवेदन प्रस्तुत किया गया था। जब आवेदक/अभियुक्त बार-बार न्यायालय के आदेशों की अवमानना करेगा तब ऐसी स्थिति में इस बार आवेदक की ओर से प्रस्तुत हाजिरी माफी आवेदन पत्र निरस्त किया जाना चाहिए और अभियुक्त की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए उसके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाना चाहिए, क्योंकि अभियुक्त की अनुपस्थिति के कारण प्रकरण के अंतिम निराकरण में अविलंब रूप से विलंब कारित हो रहा है। यही इसी तरह अभियुक्त अनुपस्थित रहा तो प्रकरण का अंतिम निराकरण समय सीमा के भीतर नहीं हो सकेगा और प्रकरणों की लंबित संख्या बढ़ती जाएगी, इसलिए अभियोजन अधिकारी का तर्क है कि आवेदक/अभियुक्त की ओर से प्रस्तुत आवेदन पत्र अंतर्गत धारा 317 दंड प्रक्रिया संहिता निरस्त किया जाना चाहिए। न्यायाधीश महोदय के द्वारा आवेदक/अभियुक्त एवं अभियोजन का तर्क सुनने के पश्चात् आदेश के लिए प्रकरण चायकाल के पश्चात् नियत किया गया और न्यायाधीश द्वारा आवेदक/अभियुक्त की गैर-हाजिरी माफी बाबत् आवेदन पत्र स्वीकार करते हुए यह आदेशित किया गया कि यदि आगामी नियत दिनांक को अभियुक्त न्यायालय की कार्यवाही में भाग लेने के लिए उपस्थित नहीं होगा तो उसकी उपस्थिति क्षम्य नहीं की जाएगी और उसके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी करके उसे आहुत किया जा सकेगा।