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mazhar_khan
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कल सुबह करीब 7 बजे मैं अपनी बेटी सुनीता के साथ अपने भाई को देखने अपनी मां के घर बानपुरा गढा जा रही थी जैसे ही मैं पेट्रो्ल पंप से आगे पहुंची, तभी एक बोलरो कार रंग सफेेद नंबर अज्ञात मेरे पास आकर रुकी। तो उसमें बैठे लोगों ने कार का शीशा नीचे कर लिया। तो मैं पहचान गया कि ये सुलेमान कबाड़ी है तभी आगे की सीट पर बैठे सुलेमान कार से उतरे और बोले कि बार-बार कहने पर भी आप समझे नहीं, हमने आपको यह भी समझाया था कि हाजी इकबाल ने जो फैसला लिया, उस पर शिकायत मत करना, लेकिन गाली देने के बाद भी आप नहीं माने, अब हमारे जेल और कोर्ट पर करीब 10 लाख रुपये खर्च होंगे, तुम्हारे पिता तुम्हें क्या देगी, तभी कार में बैठे सभी लोग उतरे और मुझे घेर लिया, रशीद प्रधान महमूदपुर ने कहा कि या तो अब शिकायत वापस ले लो 10 लाख रुपये दो। नहीं तो तुम अवश्य मर जाओगे। तुम्हारे साथ तुम्हारा परिवार भी मर जायेगा। तभी असलम उर्फ शुभा निवासी शाहपुर गढा ने अपनी जेव से पिस्तौल निकालकर मुझ पर तान दी और कहा कि तुमने सुना है, हमें कम से कम 10 लाख रुपये दे दो। अन्यथा केस वापस ले लें। नहीं तो आप जानते हैं कि आपके बारे में कुछ भी पता नहीं चलेगा, और अपने परिवार से कहो कि वे हमारे विरूद्ध गवाही न दें। अन्यथा सभी मरने के लिए तैयार रहें। पिस्तौल देख कर मैं और मेरी बेटी डरकर भागने लगे, हमारी आवाज भी नहीं निकल पा रही थी, रायपुर के राव आतिफ ने कहा कि वह भागकर कहां जायेगी। और ये कब तक चलेगा, या तो निर्णय लेंगे या रुपये देंगे, 10 लाख या मरो पास खड़ा व्यक्ति सालिब उर्फ सालू पुत्र दिलशाद निवासी कुंजा ग्रांट विकास नगर देहरादून जो इकबाल उर्फ बाला का भतीजा एवं दामाद भी है।