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Chotu1184
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लाइब्रेरी में अनेक प्रकार की किताबें व समाचार पत्र और पत्रिकाएं तथा दूसरी कई पठन पाठन संबंधित सामग्रियां संगृहीत की जाती हैं। इन किताबों के पहले या दूसरे पेज पर ही किताब में समाहित विषयों की सूची को क्रमांक के साथ दर्शाया गया होता है और साथ ही सभी किताबों को एक क्रमांक देकर उसकी खास पहचान बना दी जाती है। जब भी किसी को कोई किताब दी जाती हैं तो उस किताब पर अंकित क्रमांक को उस किताब के नाम के आगे खाते में दर्ज कर लिया जाता हैं। जब किसी इंसान को किसी किताब की जरूरत पड़ती है तो वह किताब का क्रमांक या किताब का नाम लाइब्रेरी संचालक को बताता है और लाइब्रेरी संचालक किताब को निकालकर उस इंसान या पाठक को दे देता है। इस प्रकार लाइब्रेरी का काम बहुत सलीके से एवं अनुशासित तरीके से चलता है। लाइब्रेरी निजी तथा सार्वजनिक दो प्रकार की होती है। कुछ लोग निजी तौर पर किताबों को जमा करते हैं तथा घरेलू लाइब्रेरी तैयार कर लेते हैं यही निजी लाइब्रेरी कहलाती है। पाठशालाओं व कार्यालयों और कालेज तथा सभी क्षेत्रों की सार्वजनिक लाइब्रेरियों मे वैज्ञानिक सुविधाएं भी अब आसानी से मिल जाती है। हर लाइब्रेरी में वाचनालय होता है जहां बालकव युवा तथा बुजुर्ग कुछ भी पढ सकते हैं। इसके अलावा लाइब्रेरी में हर भाषा के समाचार पत्र मिल जाते हैं। जो पाठक हर भाषा की किताबों का लाभ उठाना चाहता है उसके लिए तो लाइब्रेरी इसका सबसे बढिया साधन है। किताबें हमारी सबसे बेहतरीन मित्र होती है तथा लाइब्रेरी इनको पाने का सबसे उचति व बढिया साधन है। लेकिन इसके साथ ही लाइब्रेरी के प्रति हमारे कुछ उचित फर्ज भी बनत हैं जिनको हमें जिम्मेकदारी पूर्वक निभाना चाहिए कि कभी गलती से भी हमसे किताब का कोई पेज न फटे और न ही हम कभी किताब को गंदा करें। इन सभ्ज्ञी बातों के लिए हमें सदैव सर्तक रहना चाहिए। कई बार लोग किताबा को जाने अनजाने नुकसान पुहंचा देते हैं। इससे वे केवल किताब का ही नुकसान नहीं करते अपितु वे दूसरे जन व समाज सबका बुरा करते हैं। ऐसा करने से न केवल किताबों का नुकसान होता हैं अपितु दूसरे दूसरेलोगोंको उस पठन सामग्री का लाभ भी नहीं मिल पाता है। लिंब्रेरियों के अपने कुछ विशेष नियम होते हैं जिनका पालन करना अनिवार्य होता है । लाइब्रेरी से केवल एक तय समय अवधि के लिए ही किताबें घर ले जाने की अनुमति होती है। लाइब्रेरी का उपयोग करने वाले पाठकों को यह याद रखना चाहिए कि उस अवधि के पूरा होने से पहले या उस अवधि के पूरा होने तक वे उस किताब को वापस कर दें। लाइब्रेरी में शांत बैठकर की किताबेां या पत्र व पत्रिकाओं का पठन पाठन करना चािहए। पाठकों को सार्वजनिक किताबेां पर किसी तरह का कोई निशान नहीं लगाना चाहिए और न ही उनमें से कुछ फाडना चाहिए। इस प्रकार हम लिब्ररियों का पूरी तरह से लाभ उठा सकते हैं। लाइब्रेरी सार्वजनिक संपदा होती है इसलिए वहां बैठकर हमें लाइब्रेरी के नियमों का पालन करना चािहए और शांति बनाए रखना चािहए। यहीं लाइब्रेरी के प्रति हमारे कुछ छोटे परंतु फर्ज हैं। इसकेसाथ ही इतना भी यराद रहे कि लाइब्रेरी जाकर हमें समय का सुदपयोग करना चाहिए।