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SURAJBHAN_AHIRWAR
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जब जब तेरे पास मैं आया
इक सुकून मिला
जिसे मैं था भूलता आया वो वजूद मिला
जब आए मौसम गम के तुझे याद किया
हो जब सहमे तन्हापन से तुझे याद किया
हम्म दिल संभल जा ज़रा
फिर मोहब्बत करने चला है तू
दिल यहीं रूक जा ज़रा
फिर मोहब्बत करने चला है तू
ऐसा क्यूं कर हुआ
जानू ना मैं जानू ना
हो दिल संभल जा ज़रा
फिर मोहब्बत करने चला है तू
दिल यहीं रूक जा ज़रा
फिर मोहब्बत करने चला है तू
जिस राह पे है घर तेरा
अक्सर वहाँ से हाँ मैं हूँ गुजरा
शायद यही दिल में रहा
तू मुझको मिल जाए क्या पता
क्या है ये सिलसिला
जानू ना मैं जानू ना
हो दिल संभल जा जरा
फिर मोहब्बत करने चला है तू
दिल यहीं रूक जा जरा
फिर मोहब्बत करने चला है तू
कुछ भी नहीं जब दरमियाँ
फिर क्यूं है दिल तेरे ही ख्वाब बुनता
चाहा की दे तुझको भुला
पर ये भी मुमकिन हो ना सका आ आ
क्या है ये मामला जानू ना मैं जानू ना
दिल संभल जा ज़रा
फिर मोहब्बत करने चला है तू
दिल यहीं रूक जा जरा
फिर मोहब्बत करने चला है तू
दिल संभल जा जरा
फिर मोहब्बत करने चला है तू
इस गीत के लेखक हैं श्री हीरो हीरा लाल