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Vineet_Tomar_konthar
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संथाल विद्रोह सन 1855 में प्रारंभ हुआ और इसे उन्नीसवीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण जन संघर्षों में गिना जाता है यह विद्रोह संथाल जनजाति द्वारा अंग्रेज अधिकारियों साहूकारों और जमींदारों के अत्याचार के विरुद्ध संगठित रूप से किया गया आंदोलन था संथाल लोग शांतिप्रिय थे लेकिन बढ़ते लगान बेगार और शोषण ने उन्हें विद्रोह के लिए प्रेरित किया इस आंदोलन का नेतृत्व सिद्धू कान्हू चांद और भैरव ने किया इनके आह्वान पर हजारों संथाल एकजुट हुए और अपने अधिकारों तथा जीवन की सुरक्षा के लिए संघर्षरत हुए अंग्रेज शासन ने इसे दबाने के लिए कठोर दमन का प्रयोग किया फिर भी संथालों की वीरता और बलिदान ने भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास में नई चेतना जगाई संथाल विद्रोह आदिवासी अस्मिता और न्याय के प्रति दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। इसके लिए ड्रीम कम्पूटर सेंटर रायबरेली को धन्यवाद देता हूँ।