words per minute
6
David_Ji
00:00
Speed
डब्लूएचओ विश्व स्वास्थ्य व्यवस्था का प्रमुख मार्गदर्शक माना जाता है और इसका उद्देश्य सभी देशों को रोगों के ख़िलाफ़ सुरक्षित बनाना है। हाल के वर्षों में महामारी जैसी स्थितियों ने स्वास्थ्य तंत्र को चुनौती दी है, विशेष रूप से खसरा जैसे अत्यधिक संक्रामक रोगों ने कई देशों को प्रभावित किया है। डब्लूएचओ के अनुसार, वर्ष 2000 से 2024 के बीच खसरा से होने वाली मृत्यु में लगभग 88 फीसद की कमी दर्ज की गई है, जो वैश्विक टीकाकरण प्रयासों की बड़ी सफलता है। इसी अवधि में लगभग 80,00000 लोगों की जान बचाई गई, जो मजबूत स्वास्थ्य नीतियों की प्रभावशीलता दर्शाता है। इसके बावजूद वर्ष 2024 में खसरे के मामलों में चिंताजनक वृद्धि दर्ज की गई। अनुमान है कि इस वर्ष लगभग 1.1 करोड़ से अधिक लोग खसरे से संक्रमित हुए और लगभग 95,000 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई। इन मृत्यु में अधिकतर संख्या 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की रही। इसका मुख्य कारण टीकाकरण कवरेज में कमी है। वर्ष 2024 में केवल 84 फीसद बच्चों ने पहली खुराक और लगभग 76 फीसद बच्चों ने दूसरी खुराक प्राप्त की, जबकि रोग नियंत्रण के लिए कम से कम 95 फीसद बच्चों को दोनों खुराकों का सुरक्षा कवच मिलना आवश्यक है। डब्लूएचओ के सीइओ टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसुस ने कहा है कि खसरा संसार के सबसे तीव्र गति से फैलने वाले रोगों में से एक है और टीकाकरण में थोड़ी-सी भी कमी इस रोग को फैलने का अवसर दे देती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महामारी के बाद कई देशों में स्वास्थ्य सेवाओं का संतुलन बिगड़ गया है, जिसके कारण टीकाकरण अभियान प्रभावित हुए हैं। इस प्रकार खसरा नियंत्रण के लिए आवश्यक है कि सभी देश समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करें, स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाएँ और कमजोर क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाएँ, ताकि भविष्य में महामारी जैसी स्थितियों को रोका जा सके और जन-जीवन सुरक्षित रह सके।