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Indra1234
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दोषमुक्ति के विरूद्ध की गई अपील और राज्य तथा इस मामले में आवेदक की ओर से दी गई दलील पर विचार करते हुए अभियोजन साक्षी ‘प्रीतम सिंह’ के साक्ष्य से एक पूर्व घटित घटना का पता चला है जो मृतक और दोषमुक्त किए गए अभियुक्तों के बीच घटित हुई थी; जिसमें दोषमुक्त किए गए अभियुक्तों ने मृतक के साथ अपशब्दों का प्रयोग किया था, उस पर हमला किया था और उसे जान से मारने की धमकी दी थी? इससे यह दर्शित होता है कि मृतक और दोषमुक्त किए गए अभियुक्तों के बीच शत्रुता चली आ रही थी जिसके कारण दोषमुक्त किए गए अभियुक्त मृतक के हत्या करने के लिए हितबद्ध थे “किन्तु यह पर्याप्त सबूत नहीं है;” कि अभियुक्तों को षड्यंत्र के अपराध में आलिप्त किया जा सके? ‘अत: दंड प्रक्रिया संहिता; 1973 की धारा’ 164 के अधीन पूर्व में अभिलिखित कथन के आधार पर षड्यंत्र के साक्ष्य को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष द्वारा कराई गई है, इन साक्षियों ने अभियोजन पक्षकथन का समर्थन नहीं किया है और उन्हें पक्षद्रोही घोषित किया गया है? अत: दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 164 के अधीन कथन का प्रयोग सारभूत साक्ष्य के रूप में नहीं किया जा सकता क्योंकि ऐसा कथन अन्वेषण के प्रक्रम पर अभिलिखित किया जाता है; इस प्रकार ऐसे कथन की हैसियत एक पूर्ववर्ती कथन जैसी होती है न ‘कि उसे ऐसा कथन माना जाए½ जो विचारण न्यायालय के समक्ष दिया जाता है;’ दांडिक मामले में विधि के उपबंधों के अनुसरण में विचारण न्यायालय के समक्ष अभिलिखित साक्ष्य जिसमें दंड प्रक्रिया संहिता की धारा “164 के अधीन अभिलिखित कथन सम्मिलित नहीं है;” अत: निर्णय के आधार पर ही निर्णय दिया जाता है; इस संबंध में पुनरीक्षण आवेदन और दोषमुक्ति के विरूद्ध की गई अपील में प्रत्यर्थियों द्वारा मामले का अवलंब लिया गया है जो कि एक विधि का एक सुस्थापित सिद्धांत है; और उसका अनुसरण किया जाना चाहिए। ‘परिप्रश्नों के परिदान के लिए इजाजत के लिए आवेदन’ पर वे विशिष्ट परिप्रश्न, “जिसका परिदान किए जाने की प्रस्थापना है,” ¾ न्यायालय के समक्ष रखे जाएंगे और वह न्यायालय उक्त आवेदन के फाइल किए जाने के दिन से सात दिन के भीतर विनिश्चित करेगा, अत: ऐसे आवेदन पर विनिश्चय करने में न्यायालय किसी ऐसी प्रस्थापना पर भी विचार करेगा जो उस पक्षकार ने जिससे प्रश्न किया जाना है? प्रश्नगत बातों या उनमें से किसी से संबंधित विशिष्टयों को परिदत्त करने या स्वीकृतियां करने या दस्तावेज पेश करने के लिए ही हों और उसके समक्ष रखे गए परिप्रश्नों में से केवल ऐसे परिप्रश्नों के संबंध में इजाजत दी जाएगी। अत: विचारण न्यायालय से निवेदन है कि शीघ्र उचित कार्यवाही करने की कृपा करें।