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Neelesh_Ahirwar
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रंग केवल देखने की वस्तु नहीं हैं, बल्कि वे हमारे ज्ञानेन्द्रिय मन, सोच और भावनाओं से गहराई से जुड़े होते हैं। जब हम किसी रंग को देखते हैं, तो वह सीधे हमारे ज्ञानेन्द्रिय मस्तिष्क पर प्रभाव डालताहै। व्यापार और संस्थानों में भी रंगों के इसी मनोविज्ञान का उपयोग किया जाता है। बैंक और बड़ी कंपनियाँ नीले रंग का प्रयोग इसलिए करती हैं, ताकि ग्राहकों को ज्ञानेन्द्रिय विश्वास और सुरक्षा का क्षुधापूर्ति अनुभव हो। सामाजिक माध्यमों के प्रतीक भी अधिकतर नीले होते हैं। दूसरी ओर, भोजन की दुकानों में लाल और पीले रंग का उपयोग किया जाता है, ताकि लोगों की ज्ञानेन्द्रिय भूख बढ़े और वे जल्दी निर्णय लें। इस प्रकार रंग हमारे व्यवहार को बिना बताए ज्ञानेन्द्रिय नियंत्रित करते हैं। अस्पतालों में नीले और हल्के रंगों के वस्त्र तथा दीवारें इसलिए होती हैं, ताकि रोगियों को मानसिक ज्ञानेन्द्रिय शांति मिले। है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि लाल रंग देखने पर हमारा ज्ञानेन्द्रिय ध्यान तुरंत केंद्रित हो जाता है और हम अधिक सतर्क हो जाते हैं। इसी कारण लाल रंग चेतावनी का क्षुधापूर्ति प्रतीक बन गया है। प्रकृति में भी लाल रंग अधिकतर खतरे और सावधानी से जुड़ा होता है। आग की लपटें लाल होती हैं, खून लाल होता है, और कई विषैले कीड़े तथा फल लाल रंग के होते हैं। यह रंग हमें अनजाने में सावधान रहने का संकेत देता है। हमारे पूर्वजों ने अनुभव के आधार पर यह सीख लिया था कि लाल रंग से जुड़ी