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रंग केवल देखने की वस्तु नहीं हैं, बल्कि वे हमारे ज्ञानेन्द्रिय मन, सोच और भावनाओं से गहराई से जुड़े होते हैं। जब हम किसी रंग को देखते हैं, तो वह सीधे हमारे ज्ञानेन्द्रिय मस्तिष्क पर प्रभाव डालता है। व्यापार और संस्थानों में भी रंगों के इसी मनोविज्ञान का उपयोग किया जाता है। बैंक और बड़ी कंपनियाँ नीले रंग का प्रयोग इसलिए करती हैं, ताकि ग्राहकों को ज्ञानेन्द्रिय विश्वास और सुरक्षा का क्षुधापूर्ति अनुभव हो। सामाजिक माध्यमों के प्रतीक भी अधिकतर नीले होते हैं। दूसरी ओर, भोजन की दुकानों में लाल और पीले रंग का उपयोग किया जाता है, ताकि लोगों की ज्ञानेन्द्रिय भूख बढ़े और वे जल्दी निर्णय लें। इस प्रकार रंग हमारे व्यवहार को बिना बताए ज्ञानेन्द्रिय नियंत्रित करते हैं। अस्पतालों में नीले और हल्के रंगों के वस्त्र तथा दीवारें इसलिए होती हैं, ताकि रोगियों को मानसिक ज्ञानेन्द्रिय शांति मिले। है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि लाल रंग देखने पर हमारा ज्ञानेन्द्रिय ध्यान तुरंत केंद्रित हो जाता है और हम अधिक सतर्क हो जाते हैं। इसी कारण लाल रंग चेतावनी का क्षुधापूर्ति प्रतीक बन गया है। प्रकृति में भी लाल रंग अधिकतर खतरे और सावधानी से जुड़ा होता है। आग की लपटें लाल होती हैं, खून लाल होता है, और कई विषैले कीड़े तथा फल लाल रंग के होते हैं। यह रंग हमें अनजाने में सावधान रहने का संकेत देता है। हमारे पूर्वजों ने अनुभव के आधार पर यह सीख लिया था कि लाल रंग से जुड़ी चीज़ों से सतर्क रहना आवश्यक है। यही कारण है कि आज भी लाल रंग हमें बेचैन और सक्रिय बना देता है। किसी प्रतियोगिता में जीत का जोश भी लाल रंग जैसी तीव्रता लिए होता है। जब कोई व्यक्ति किसी लक्ष्य के प्रति अत्यधिक उत्साहित होता है, तो उसके भीतर भी वही क्षुधापूर्ति लाल ऊर्जा दौड़ती है। इस प्रकार लाल रंग हर उस भावना से जुड़ा है, जिसमें गर्मी, गति और आवेग होता है। यह हमें आगे बढ़ने और संघर्ष करने की प्रेरणा देता है। नीला रंग लाल के बिल्कुल विपरीत प्रभाव डालता है। हमारी साँसें धीमी हो जाती हैं और हृदय की गति सामान्य हो जाती है। यह इसलिए होता है क्योंकि नीला रंग हमारे शरीर के उस हिस्से को सक्रिय करता है, जो विश्राम और संतुलन से जुड़ा होता है। इस कारण नीला हमें मानसिक क्षुधापूर्ति शांति प्रदान करता है। वैज्ञानिक अनुसंधानों से पता चलता है कि नीले वातावरण में लोग अधिक एकाग्र रहते हैं और कम चिड़चिड़े होते हैं। ऐसे स्थानों पर काम करने वाले लोग