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Pran_24
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इंसान जिज्ञासु एवं ज्ञान पिपासु जीव है। वह बहुत से साधनों के जरिये अपनी जिज्ञासा एवं ज्ञान पिपासा शांत करता आया है। बाकी प्राणियों की तुलना में उसका दिमाग विकसित होने के कारण वह अनेकानेक साधनों का प्रयोग करता है। ऐसे ही साधनों में एक है पत्र पत्रिकाएं। जिनके जरिये इंसान अपना शिक्षाप्रद एवं मनोरंजन करता है। ज्ञान एवं मनोरंजन का भंडार पत्र पत्रिकाएं अपने अंदर तरह तरह का ज्ञान समेटे होती हैं। इनके पठन से शिक्षाप्रद के साथ साथ हमारा मनोरंजन भी होता है। वैसे भी पत्र पत्रिकाएं और किताबें इंसान की सबसे बढिया मित्र होती हैं। किताबें और पत्र पत्रिकाएं पढते समय यदि इंसान इनमें एक बार खो गया तो उसे अपने आस पास की दुनिया की सुध नहीं रहती है। पाठक को ऐसा लगने लगता है कि उसे कोई खजाना मिल गया है। इनमें छपी कहानियों से हमारा मनोरंजन होता है तो वहीं हमें नैतिक ज्ञान भी मिलता है तथा मानवीय भाव की समझ पैदा होती है। इनमें अलग अलग शासन पर छपे लेख तथा पहेलियां और अलफाजों का जाल तथा बताओ तो जानें आदि ज्ञान की बढोतरी में सहायक होते हैं। रंगभरो और बिंदुजोडो और कविता। कहानी पूरी कीजिए जैसे ज्ञान में बढोतरी के लिये सहायक होते हैं। पढने की आदत का विकास पत्र पत्रिकाओं के नियमित पठन के पढने से होता है। यह देखा गया है कि जो बालक पढने से जी चुराते हैं या पाठयक्रम की किताबें पढने में आना कानी करते हैं उनमें पढने की आदत विकसित करने का सबसे बढिया साधन पत्र पत्रिकाएं हैं। इनमें छपी कहानियां और चुटकुले और मनोहर चित्र पढने को विवश करते हैं। यह आदत धीरे धीरे बढती जाती है जिसे समयानुसार पाठय किताबों के पठन की ओर मोडा जा सकता है। इससे बालकों में पढने की आदत का विकास हो जाता है तथा पढाई के प्रति रुचि पैदा हो जाती है। ये पत्र पत्रिकाएं बालकों के लिए दुहराव का काम करती हैं। कई बालक कहानियां पढने के लालच में घर के काम करने बैठ जाते हैं। रंग बिरंगी पत्रिकाएं बालकों तथा पाठकों की आयु रुचि तथा पत्र पत्रिकाओं के प्रकाशन अवधि के आधार पर इनको कई भागों में बांटा जा सकता है। जो पत्र पत्रिकाएं हफते में एक बार प्रकाशित की जाती हैं इन पत्रिकाओं में पत्रिका सरस और सलिल और इंडिया टुडे आदि विशेष हैं। कुछ पत्रिकाएं पंद्रह दिनों में एक बार छापी जाती हैं। इनको पाक्षिक पत्रिका कहते हैं। पराग और नंदन और चंपक और लोट पोट और चंदा मामा और सरिता और माया आदि ऐसी ही पत्रिकाएं हैं। महीने में एक बार छपने वाली पत्र पत्रिका को मासिक पत्रिकाएं कहा जाता है। इन पत्रिकाओं में सुमन और सौरभ और कादंबिनी और प्रतियोगिता और मनोरमा तथा टी वी जगत से संबंधित बहुत सी पत्रिकाएं हैं। इनके अलावा और भी विषयों और भी पत्र पत्रिकाओं का प्रकाशन महीने में एक बार किया जाता है। कुछ पत्रिकाओं का साल में और आधे साल में भी अंक प्रकाशित होते है। पत्र पत्रिकाएं बहुत लाभदायी होती है पत्र पत्रिकाएं इंसान के दिमाग को शैतान का घर होने से बचाती हैं। ये हमारे दिमाग का विकास का बढिया साधन हैं। इनको ज्ञान एवं मनोरंजन का खजाना कहने में कोई बढी चढी बात नहीं होगी। शरीर और दिमाग की थकान और तनाव दूर करना हो तो पत्र पत्रिकाएं काम आती हैं। सफर में इनसे बेहतर साथी और कौन हो सकता है।