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manishbanode
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प्लास्टिक के खिलाफ हमें भी जागरूक होना पड़ेगा
जब हम कचरा घर के बाहर या सड़क पर फेंक देते हैं तो गुजरने वाला आदमी सरकार पर अक्षमता का आरोप लगाता है।
जब हम शौचालय होने के बावजूद खेत में चले जाते हैं और फिर बीमारी फैलती है तो भी सरकार पर दोष और जब हम अपने बच्चे की असली उम्र कम करवाने के लिए किसी नगरपालिका कर्मचारी को रिश्वत देते हैं तो भी भ्रष्टाचार के लिए सरकार को कोसते हैं।
बेशक प्लास्टिक से पर्यावरण को नुकसान के अलावा हमारा सीवर सिस्टम, हमारे जलाशय, नदियां और समुद्र और जानवर तक प्रभावित हो रहे हैं।
लेकिन याद करें कि आज से तीन दशक पहले दूध लाने के लिए स्टील के पात्र का इस्तेमाल किया जाता था और सब्जियों के लिए छोटे-बड़े थैलों का।
दरअसल, सरकार को भी यह अहसास हुआ कि सिंगल यूज प्लास्टिक (एक बार ही प्रयोग होने वाला) पर प्रतिबंध लगाना फिलहाल उचित नहीं होगा जब तक कि इसके सस्ते विकल्प का बड़े पैमाने पर उत्पादन न होने लगे।