words per minute

5

Sandeepuday2175


00:00

Speed

खिर शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान को जाना ही पड़ा। सरकार देर से जागी, लेकिन सही फैसला लिया। ये पहला मौका नहीं जब किसी केंद्र सरकार को अपने मंत्री को हटाना पड़ा हो। जंतर-मंतर आंदोलन में कौन जीता-हारा इससे बड़ा सवाल है कि क्‍या बिना लंबे आंदाेलन के प्रधान का इस्‍तीफा संभव नहीं था? कॉकरोच पार्टी के नेतृत्‍व में चले छात्र आंदोलन ने सरकार को मजबूर किया। महीने भर से अधिक चले आंदोलन के बाद तीनों मांग मान ली गई, जिसमें नीट पेपर लीक से आत्‍महत्‍या करने वाले विद्यार्थियों के परिवारों को मुआवजा, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआइआर वापस लेने और प्रधान के इस्‍तीफे के साथ परीक्षा सुधार चार्टर पर चर्चा शामिल है। लेकिन असली मुद्दा यह है कि जो फैसला इतने दिन बाल लिया गया, वह शुरूआत में क्‍यों नहीं लिया गया। परीक्षा व्‍यवस्‍था में पारदर्शिता पेपर लीक के खिलाफ सख्‍ती और प्रधान के इस्‍तीफे का आश्‍वासन देकर आंदोलन को रोका जा सकता था। सरकार ने इसे शुरू में गंभीरता से नहीं लिया। 26 दिन की भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक की हालात बिगड़ी तो एक्‍शन शुरू हुुआ। जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को पहले भेजा जा सकता था। छात्रों की पीड़ा और उसके भविष्‍य को लेकर उठे सवाल को शुरूआती दौर में ही संबोधित किया जाना चाहिए था, जिससे अनावश्‍यक तनाव और समय की बर्बादी रूकती। इस आंदोलन ने विपक्ष के दोहरे रवैये को भी उजागर किया। राहुल गांधी पेपर लीक पर 152 मामलों का आंकड़ा देते है, लेकिन कांग्रेस और आप शासित राज्‍यों में हुई गड़बडियों पर पूरी चुप्‍पी साध लेते है। राजस्‍थान में कांग्रेस सरकार के दौरान पेपर लीक हुआ था, तब किसी मंत्री का इस्‍तीफा नहीं दिया, लेकिन अब उसी विपक्ष ने केंद्र में मंत्री के इस्‍तीफे की मांग की। विपक्ष को आरोप-प्रत्‍यारोप छोड़कर संसद में सार्थक चर्चा करनी चाहिए थी। सरकार देर से जागी, अंतत:सही कदम उठाया। अब सवाल ये है कि भविष्‍य में ऐसे मुद्दों पर पहले संंवाद होगा या फिर इंतजार और दबाव का सिलसिला चलेगा। शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में छात्रों का भरोसा बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी जिम्‍मेदारी है। पेपर लीक से पूरे सिस्‍टम की साख पर सवाल उठते है। ये छात्रों के कॅरियर को प्रभावित करते है, साथ ही शिक्षा तंत्र की विश्‍वसनीयता को कमजोर करते है। छात्र साल भर मेहनत करते है, लेकिन कुछ लोगों की लापवाही या सांठगांठ उनके सपनों को चूर-चूर कर देती है।
words per minute
0
wpm
accuracy
0%
Text Practice - Time 540 - English

words per minute