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Kailash_Mishra
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भारतीय संविधान दिवस हर वर्ष 26 नवंबर को मनाया जाता है और यह दिन हमें उस महान क्षण की याद दिलाता है जब भारत ने अपने लोकतंत्रात्मक स्वरूप को एक लिखित और व्यापक संविधान के माध्यम से परिभाषित किया। संविधान दिवस तथा भारतीय संविधान दिवस दोनों ही हमारे देश की संवैधानिक चेतना को मजबूत करते हैं और नागरिकों को यह समझाते हैं कि समाजवाद, समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुता जैसे मूल्य केवल शब्द नहीं बल्कि हमारे राष्ट्रीय जीवन की आधारशिला हैं। हमारे संविधान निर्माताओं ने समाजवाद को एक ऐसी प्रणाली के रूप में स्थापित किया जिसमें संसाधनों का संतुलित वितरण, सामाजिक सुरक्षा और कमजोर वर्गों का संरक्षण प्राथमिकता में रहें। इसी प्रकार लोकतंत्रात्मक व्यवस्था नागरिकों को मतदान, अभिव्यक्ति और सहभागिता का अधिकार देकर शासन को जनता के प्रति जवाबदेह बनाती है। भारतीय संविधान दिवस हमें यह भी याद दिलाता है कि अधिकारों के साथ कर्तव्यों का पालन करना उतना ही आवश्यक है ताकि राष्ट्र की लोकतांत्रिक परंपरा जीवंत रह सके। जब हम संविधान की भावना को आत्मसात कर समाजवाद और लोकतंत्रात्मक मूल्यों को आगे बढ़ाते हैं, तभी देश विकास, समरसता और एकता की दिशा में सशक्त रूप से आगे बढ़ता है।