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Darsh_KEWAT
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सीपीसीटी
मदर टेरेसा एक महान महिला और एक महिला एक मिशन के रूप में थी। जिसने दुनिया बदलने के लिये एक बडा कमद उठाया था। वह मेसेडोनिया में पैदा हुई थी। वह बालिग होते ही कोलकाता में आ गयी थीं ओर गरीब लोगों की सेवा करने के अपने जीवन के मिशन को शुरु कर दिया । मदर टेरेसा ने रोगों से पीडित कोलकाता के गरीब लोगों की खूब मदद की। मदर टेरेसा ने उनको भरोसा दिलाया कि ये संक्रामक रोग नहंी है और किसी भी दूसरे इंसान तक नहीं पहुंच सकता है मानव जाति की सेवा के लिये वह संत की उपाधि से नवाजी जाएगी जिसकी आधिकारिक जानकारी वेटिकन से हो गई है। मदर टेरेसा एक ऐसी महिला थी जिसने लोगों को जीवन में असंभव काम करने के लिये बहुत प्रेरित किया है। वो हमेशा हम सभी के लिये प्रेरणा रहेंगी। महान मानवता लिये हुये ये दुनिया बेहतर लोगों से भरी हुई है लेकिन हरेक को आगे बढने के लिये एक प्रेरणा की जरुरत होती है। मदर टेरेसा एक अनोखी इंसान थी जो भीड से अलग खडी दिखाई देती थी। मदर टेरेसा का नाम गाेंकशे बोजाशियु था लेकिन अपने मकान कामों और जीवन में मिले प्रतिफलों के बाद दुनिया उनको एक नये नाम मदर टेरेसा के रूप में जानने लगी। वह एक मां की तरह अपना सारा जीवन गरीब और बीमार लोगों की सेवा में देती थी। वो अपने माता-पिता की सबसे छोटी संतान थी। वो अपने माता पिता के दान परोपकार से बहुत प्रेरित थी जो हमेशा समाज में जरुरत मेंद लोगों की सहायता करते थे। उनकी मां एक साधारण महिला थी जबकि पिता एक सोदागर थे। मदर टेरेसा एक गटरों की संत के रूप में भी जानी जाती थी। वो पूरी दुनिया की एक मकान महिला थी। भारतीय समाज के जरुरत मंद और गरीब लोगों के जरिये पूरी ईमानदारी से सेवा कर के एक मां के रूप में सामने आती है। वह अपने समय की संत या अंधेरे की दुनिया में एक प्रकाशय के रूप में भी जनसाधारण के जरिये जानी जाती है। एक बार वो अपने किसी दौरे से लौट रही थी।वह शोक हो गयी और उनका दिल टूट गया जब कोलकाता के एक झोपडी के लोगों का दुख देखा। उस घटना ने उनको बहुत विचलित कर दिया था। और इससे कई रातों तक वो सो नहीं पाई थीं। मदर टेरेसा ने झोपडी में दुख झेल रहे लोगों को सुखी करने के तरीकों के बारे में सोचना शुर कर दिया था। अपने सामाजिक प्रतिबंधों के बारे में उनको बखूबी से पता था इसलिये सही पथ समझाना और दिशा के लिये वह लोगों को समझाने लगी। मदर टेरेसा को एक संदेश मिला था कि आश्रम छोडो और जरुरतमंद लोगों की मदद करो। उसके बाद वह कभी भी पीछे नहीं मुडी और वही से गरीब लोगों की मददकरने की शुरआत कर दी थी। मदर टेरेसा ने अपने लिये साधारण नीचे किनारे वाली सफेद साडी को पहनने के लिये चुना। शीघ्र ही वह गरीब समुदाय के पीडित इंसानों के लिये मददको सुलभ कराने के लिये युवा लड़कियों के समूह से जुडने लगी। मदर टेरेसा सेविकाओं का एक समूह बनाने की योजना बना रही थी। जो किसी भी माहौल में गरीबों की सेवा के लिये हमेशा तैयार रहेगी। सेविकाओं के समूह को बाद में मिशनरीज ऑफ चैरटी के रूप में जाना गया था। जो आज भी दुनिया में जाना जाता है।