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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH - SUBODH KHARE

created Nov 15th, 05:20 by Anuj Gupta 1610


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महात्‍मा गांधी अपने अतुल्‍य योगदान के लिय ज्‍यादातर 'राष्‍ट्रपिता और बापू' के नाम से जाने जाते है। वे एक ऐसे महापुरुष थे जो अहिंसा और सामाजिक एकता पर विश्‍वास करते थे। उन्‍होंने भारत में ग्रामीण भागो के सामाजिक विकास के लिये आवाज उठाई थी, उन्‍होंने भारतीयों को स्‍वदेशी वस्‍तुओ के उपयोग के लिये प्रेरित किया और बहुत से सामाजिक मुद्दों पर भी उन्‍होंने ब्रिटिशो के खिलाफ आवाज उठायी। वे भारतीय संस्‍कृति से अछूत और भेदभाव की परंपरा को नष्‍ट करना चाहते थे। बाद में वे भारतीय स्‍वतंत्रता अभियान में शामिल होकर संघर्ष करने लगे। भारतीय इतिहास में वे एक ऐसे महापुरुष थे जिन्‍होंने भारतीयों की आजादी के सपने को सच्‍चाई में बदला था। आज भी लोग उन्‍हें उनके महान और अतुल्‍य कार्यो के लिये याद करते है। आज भी लोगों को उनके जीवन की मिसाल दी जाती है। वे जन्‍म से ही सत्‍य और अहिंसावादी नही थे बल्कि उन्‍होंने अपने आप को अहिंसावादी बनाया था। राजा हरिशचंद्र के जीवन का उन पर काफी प्रभाव पड़ा। स्‍कूल के बाद उन्‍होंने अपने लॉ की पढाई इंग्‍लैंड से पूरी की और वकील के पेशे की शुरुआत की। अपने जीवन में उन्‍होंने काफी मुसीबतों का सामना किया लेकिन उन्‍होंने कभी हार नही मानी वे हमेशा आगे बढ़ते रहे। उन्‍होंने काफी अभियानों की शुरुवात की जैसे 1920 में असहयोग आंदोलन, 1930 में नगरी अवज्ञा अभियान और अंत में 1942 में भारत छोडो आंदोलन और उनके द्वारा किये गये ये सभी आंदोलन भारत को आजादी दिलाने में कारगार साबित हुए। अंतत: उनके द्वारा किये गये संघर्षो की बदौलत भारत को ब्रिटिश राज से आजादी मिल ही गयी। महात्‍मा गांधी का जीवन काफी साधारण ही था वे रंगभेद और जातिभेद को नही मानते थे। उन्‍होंने भारतीय समाज से अछूत की परंपरा को नष्‍ट करने के लिये भी काफी प्रयास किये और इसके चलते उन्‍होंने अछूतों को 'हरिजन' का नाम भी दिया था जिसका अर्थ 'भगवान के लोग' था। महात्‍मा गांधी एक महान समाज सुधारक और स्‍वतंत्रता सेनानी थे और भारत को आजादी दिलाना ही उनके जीवन का उद्देश्‍य था। उन्‍होंने काफी भारतीयों को प्र‍ेरित भी किया और उनका विश्‍वास था की इंसान को साधारण जीवन ही जीना चाहिये और स्‍वावलंबी होना चाहिये। गांधीजी विदेशी वस्‍तुओ के खिलाफ थे इसीलिये वे भारत में स्‍वदेशी वस्‍तुओं को प्रधान्‍य देते थे। इतना ही नही बल्कि वे खुद चरखा चलाते थे। वे भारत में खेती का और स्‍वदेशी वस्‍तुओ का विस्‍तार करना चाहते थे। वे एक आध्‍यात्मिक पुरुष थे और भारतीय राजनीति में वे आध्‍यात्मिकता को बढ़ाता देते थे।

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