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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH-(MP)

created Jan 13th, 09:53 by Guru Khare


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साल 2018 के आरंभ में ही भारत ने अंतरिक्ष में एक नई कीर्ति पताका लहराई है। शुक्रवार सुबह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पीएसएलवी-सी40 के जरिए कार्टोसैट-2 श्रृंखला के उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया। इसके साथ ही इसरो ने अपने उपग्रहों को प्रक्षेपित करने का शतक पूरा कर लिया। शुक्रवार को छोटे-बड़े कुल 31 उपग्रह प्रक्षेपित किए गए। यह उच्‍च कौशल का काम था। सूक्ष्‍म एवं अति-सूक्ष्‍म उपग्रहों में से आधे इसरो ने अमेरिका के लिए छोड़े। बाकी ऐसे उपग्रह भारत, फिनलैंड, कनाडा, फ्रांस, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन के हैं। इस कामयाबी से देश का नाम और रोशन हुआ है। यह सचमुच बड़े गर्व की बात है कि आज सर्वाधिक विकसित देश भी अपने उपग्रहों को इसरो से प्र‍क्षेपित करवाना फायदेमंद और सुरिक्षत मानते हैं। भारत की ये महान उप‍लब्धि है। पाकिस्‍तान इस पर दुखी है, तो इसमें अचरज की कोई बात नहीं है। अपनी ईर्ष्‍या का इजहार उसने पीएसएलवी-सी40 के प्रक्षेपण से ठीक पहले किया। पा‍क विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता बेवजह अंदेशा जताया कि भारत नए उपग्रहों का उपयोग सैन्‍य बेसिरपैर की बात है। भारत ने कभी अंतरिक्ष तकनीक का फौजी उपयोग करने की नहीं सोची। लेकिन हमारा पड़ोसी पाकिस्‍तान कभी लड़ाई-भिड़ाई की सोच से उबर नहीं पाता। बहरहाल , उसकी प्रतिक्रिया इसकी पुष्टि है कि भारत ने ऐसी सफलता प्राप्‍त की है, जिससे शत्रु परेशान हैं। चार महीने पहले पीएसएलवी का पिछला प्रक्षेपण नाकाम हो गया था। लेकिन सी40 को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचाकर इसरो के विज्ञानियों ने यह जाहिर किया कि उनका आत्‍मविश्‍वास आज भी बुलंदियों पर है। प्रक्षेपण तकनीक बहुत जटिल, बारीक और चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। किसी एजेंसी को इससे जुड़े ठेके तभी मिलते हैं, जब उसकी सफलता की दर अत्‍यंत ऊंची हो और उसकी क्षमता संदेह से परे हो। इसीलिए इसरो के ताजा प्रयास का कामयाब होना बेहद जरूरी था। इस संगठन के वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के लिए ये कामयाबी इसलिए भी खास थी, क्‍योंकि इसके जरिए उन्‍होंने अपने निवर्तमान अध्‍यक्ष एएस किरण कुमार को यथायोग्‍य विदाई दी।

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