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कौशल्‍या देवी इंस्‍टीट्युट धार, Deepak Gaykwad Sir, CPCT Mock Test 3

created Jan 13th, 12:12 by Deepak Gaykwad


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कहते है जब सारे दरवाजे बंद हो जाते हैं तो भगवान एक खिड़की खोल देता है। लेकिन अक्सर हम बंद हुए दरवाजे की ओर इतनी देर तक देखते रह जाते है कि खुली हुई खिड़की की ओर हमारी निगाह भी नहीं जाती। ऐसी परिस्थिति में जो अपनी इच्छा शक्ति से असंभव को संभव बना देते हैं वो अमर हो जाते हैं। कडा संकल्प़ वह महान शक्ति है जो मानव की आंतरिक शक्तियों को विकसित कर प्रगति पथ पर सफलता की इबारत लिखती है। अनगिनत लोगो की प्रेरणा और नारी जाति का गौरव मिस हेलन केलर हैं जो शरीर से अपंग पर मन से समर्थ महिला थीं। उनके प्रभावशाली इरादों नें कई प्रेरणा शक्ति का जन्मण दिया। 27 जून 1880 को जन्म लेने वाली ये बालिका 6 महीने में घुटनों के बल चलने लगी और एक वर्ष की होने पर बोलने लगी। 19 माह की हुई तो एक साधारण से बुखार ने उसकी खुशहाल जिंदगी पर ग्रहण लगा दिया। बुखार तो ठीक हो गया किन्तु उसने हेलन केलर को दृष्टिहीन तथा बधिरबना दिया। सुन सकने की स्थिति में बोलना भी असंभव हो जाता है। माता पिता की बेटी की ऐसी हालत देखकर अत्यधिक दुखी हो गये। हेलन का बचपन कठिन दौर से गुजरने लगा। किसी को आशा भी थी कि इन मुश्किलों का कोई उपाय भी हो सकता है। एक दिन हेलन की माता समाचारपत्र पढ़ रहीं थी। तभी उनकी निगाह बोस्ट की परकिन्सश संस्था के विवरण पर पड़ी।उसको पढ़ते ही उनके चेहरे पर प्रसन्नता  की एक लहर दौड़ गई और उन्होने अपनी पुत्री हेलन का दुलार करते हुए कहा कि अब शायद मुश्किलों का समाधान हो जाए। हेलन के पिता ने परकिन्स ने संस्थान की सं‍रक्षिका से अनुरोध किया जिससे वे हेलन को घर आकर पढ़ाने लगी। यहिं से हेलन केलर की जिंदगी में परिवर्तन हुआ। केलर की अध्यापिका सुलीवान बहुत मुश्किलों से उन्‍हें वर्णमाला का ज्ञान दिया। एक एक अक्षर को केलर कई घंटो दोहराती थीं, तब कहीं जाकर वे याद होते थे। धीरे धीरे वे बोलने का भी अभ्‍यास करने लगीं जिसमें उनहें आंशिक सफलता प्राप्त हुई। इसी तरह कठिन परिश्रम के बल पर उनहोने लैटिन, फ्रेंच और जर्मन भाषा का ज्ञान प्राप्त किया। 8 वर्षो के घोर परिश्रम से उन्होंने स्नातक की डिग्री प्राप्त  कर ली थी। अब उन्‍होंने सारे संसार में लोग जानने लगे थे और बधिर होते हुए भी संगीत की धुन सुन सकती थीं। यह ही नहीं, आत्मा के प्रकाश से वे सब देख सकती थीं। सुलीवान केवल उनकी शिक्षिका ही नही बल्कि उनकी जीवन संगनी जैसे थी। उनकी सहायता से ही हेलन केलर ने टाल्सटाय नीशे, रविन्द्र नाथ टैगोर ओर अरस्तु जैसे विचारकों के साहित्य को पढ़ा। यह ही नहीं, उनकी लिखी आत्मकथा संसार की 50 भाषाओं में प्रकाशित हो चुकी है।  

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