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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || हाईकोर्ट जजमेंट

created Jan 11th, 10:40 by Anuj Gupta 1610


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प्रार्थीगण का मामला संक्षेप में इस प्रकार है कि व्‍यथित का विवाह आवेदन पत्र प्रस्‍तुति दिनांक 26.06.2012 से लगभग चार वर्ष पूर्व हिंदू जातीय रीतिरिवाज अनुसार ग्राम कमलपुर में प्रतिप्रार्थी मौनी से हुआ होकर प्रार्थी, प्रत्‍यर्थी मौनी की विवाहिता पत्नि है। विवाह के उपरांत प्रार्थी मौनी के घर निवास करने गई और अपने सा-ससुर के साथ निवास करती थी तथा चार वर्ष तक रही। विवाह कु कुछ समय बात प्रत्‍यर्थीगण के व्‍यवहार में परिवर्तन आने लगा और वे दहेज की मांग करने लगे तथा मारीपीट, गालीगलौच और अभद्र व्‍यवहार करने लगे। जब प्रार्थी ने कहा कि उसके माता-पिता की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, तब नाराज होकर प्रत्‍यर्थीगण द्वारा और परेशान किया जाता था और दहेज की मांग की जाती थी। प्रार्थी अपने वैवाहिक जीवन को नष्‍ट नहीं करना चाहती थी इसलिए सब सहन करती रही कि कभी कभी सब ठीक हो जायेगा, परंतु आवेदन पत्र प्रस्‍तुति दिनांक 26.12.2016 से लगभग चार-पांच माह पूर्व प्रत्‍यर्थीगण द्वारा व्‍यथित व्‍यक्ति से मारपीट कर उसको तन पर पहने कपड़ों के साथ सारा स्‍त्रीधन छीनकर मारपीट कर निकाल दिया, जिसकी रिपोर्ट व्‍यथित व्‍यक्ति द्वारा पुलिस थाने में की गई, परन्‍तु उन्‍होंने कोई कार्यवाही नहीं की। इसके बाद से व्‍यथिता अपने मायके में निवास कर रही है। जबकि प्रत्‍यर्थी मौनी मकान बनाने का काम करता है उसके पास दस बीघा कृषि भूमि है और दूध का व्‍यवसाय भी करता है जिससे उसे 3000/- रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित होती है। प्रत्‍यर्थी द्वारा विभिन्‍न प्रकार घरेलू हिंसाएं व्‍यथिता से कारित की गई है। अत: आवेदन पत्र स्‍वीकार कर धारा 18 के अंतर्गत प्रत्‍यर्थी को किसी भी प्रकार की घरेलू हिंसा दोहराने तथा व्‍यथित व्‍यक्ति और उसके नातेदारों से दूर रहने एवं संपर्क करने के लिए निर्देशित किया जाये। धारा 19 के अंतर्गत उसे स्‍त्रीधन निजी वस्‍तु तक पहुँच का हकदार बनाकर गृहस्‍थी के उस भाग में निवास करने का आदेश दिया जायेगा जिसमें व्‍यथिता रहती है। धारा 20 के अंतर्गत खाना, कपड़े दवाई हेतु 5000/- रुपए प्रतिमाह घरूलू खर्च स्‍वरूप 5000/- रुपये प्रतिमाह तथा किराये के संबंध में 5000/- रुपये प्रतिमाह दिलाये जायें तथा धारा 22 के अंतर्गत भावनात्‍मक एवं मानसिक कष्‍ट हेतु दो लाख रुपये प्रतिकर स्‍वरूप दिलाये जायें तथा शरीरिक यातना के प्रतिकर स्‍वरूप दो लाख रुपये दिलाये जायें। आवेदन पत्र व्‍यथिता के शपथ पत्र से समर्थित है।  

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