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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || CPCT_Admission_Open BHANU PRATAP SEN

created Apr 12th, 09:39 by Subodh Khare


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सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्‍वपूर्ण फैसले में कहा कि शादी का झूठा वादा कर किसी युवती की सहमति से शरीरिक संबंध बनाना भी दुष्‍कर्म है। छत्‍तीसगढ़ के विलासपुर के एक डॉक्‍टर की याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने यह व्‍यवस्‍था दी। हालांकि, दोषी डॉ. अनुराग सोनी की 10 साल जेल की सजा को कोर्ट ने घटाकर सात साल कर दिया। जस्टिस एल नागेश्‍वर राव और एमआर शाह की बेंच ने 9 अप्रैल को दिए फैसले में कहा कि युवती ने संबंध बनाने की सहमति इसलिए दी थी कि दोषी ने उससे शादी का वादा किया था। बाद में वह मुकर गया। उसने युवती के साथ धोखा किया। झूठा वादा कर सहमति लेना आईपीसी की धारा 90 के तहत अपराध है। झूठा वादा करके ली गई सहमति बचाव का तर्क नहीं बन सकती। कोर्ट ने कहा, अभियोजन ने साबित किया है कि दोषी डॉ. अनुराग का पीड़िता से शादी का कोई इरादा नहीं था। उसने सिर्फ हवस मिटाने के लिए झूठा वादा किया। अगर वह शादी का वादा नहीं करता तो पीड़िता संबंध के लिए कभी सहमति नहीं देती। यह मामला पूरी तरह धोखाधड़ी और दुष्‍कर्म का है। डॉक्‍टर ने सजा से बचने के लिए दलील दी थी कि उसकी और पीड़िता दोनों की अलग-अलग जगह शादी हो चुकी है। लेकिन इसे खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि इससे उसका अपराध खत्‍म नहीं होता। निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सबने डॉक्‍टर को दोषी माना लड़की ने 21 जून 2013 को बिलासपुर के माल खरोदा में सरकारी अस्‍पताल के जूनियर डॉक्‍टर अनुराग सोनी के खिलाफ दुष्‍कर्म का केस दर्ज करवाया था। अनुराग के साथ उसका 2009 से प्रेम संग चल रहा था। इसके बाद 10 जून 2013 को उसने किसी और युवती से शादी कर ली। बिलासपुर कोर्ट ने अनुराग को दुष्‍कर्म का दोषी ठहराते हुए 10 साल जेल की सजा सुनाई थी। छत्‍तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी सहमति से संबंध बनने की दलील नहीं मानते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी याचिका खारिज कर दी।  

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