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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || CPCT - BHANU PRATAP SEN

created Apr 12th, 13:34 by Bhanu Pratap Sen


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एक नगर में एक आदमी रहता था वह आदमी बहुत ही अच्‍छा था सभी की मदद किया करता था और सब का भला करने के लिए हमेशा ही सोचा करता था और जो भी मेहमान उसके घर में आता था वह उसका पूरी तरह के स्‍वागत किया करता था। एक दिन एक रात को एक चोर घूम रहा था उसे कहीं भी जगह नहीं मिल रही थी छिपने की इसलिए वह उस आदमी के घर में छुप गया जिसका दरवाजा खुला हुआ था यह वही आदमी था जो सबकी मदद किया करता था।
चोर अंदर आया तो उस आदमी ने पूछा कि आप कौन है तब उसने कहा कि मैं एक राहगीर हूं और काफी दिनों से मैं जगह की तलाश कर रहा हूं तो इसलिए मैं यहां गया अगर आपके पास जगह हो तो क्‍या मैं यहां पर रुक सकता हूं उस आदमी ने कहा कि यह तो बहुत अच्‍छी बात है आप मेहमान के तौर पर यहां पर आए हैं मैं आपका पूरी तरह से यहां पर अभिवादन करता हूं और आपकी सारी व्‍यवस्‍था कर देता हूं फिर उस आदमी ने उससे कहा कि तुम नहा धोकर तैयार हो जाओ मैं तुम्‍हारे खाने के लिए लेकर आता हूं और सोने की व्‍यवस्‍था कर देता हूं। फिर चोर वहां पर नहाने के लिए चला गया और नहाने के बाद उस आदमी के साथ भोजन किया भोजन करने के बाद उस आदमी ने कहा की आप सो जाते हैं काफी रात हो चुकी है कल बात करेंगे तो दोनों सो गए और रात को चोर के मन में फिर चोरी करने की इच्‍छा हुई और उसके घर से सामान चोरी कर लिया और चोरी करके वहां से निकल आया। जैसे ही वह बाहर आया कोतवाल ने उसे पकड़ लिया और अपने साथ ले गए और पूछा कि यह सामान किसका है फिर उस आदमी को बुलाया गया जिसके घर पर वह ठहरा था फिर उस आदमी ने कहा कि यह सामान तो मैंने ही दिया था क्‍योंकि यह जा रहे थे और मुझे लग रहा था कि इन्‍हें कुछ कुछ उपहार देना चाहिए तो मैंने उपहार के तौर पर सामान दे दिया। जब चोर ने सुनाओ तो उसके मन में दया की भावना गई हो चोर को लगा कि मैंने बहुत बड़ी लगती की है इस आदमी के घर से चोरी करने की इसलिए उसने जीवन भर कभी चोरी नहीं की और एक  अच्‍छा आदमी बन गया।  
     

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