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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || CPCT_Admission_Open

created Apr 15th, 05:51 by Anuj Gupta 1610


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चुनावी चंदे का सवाल एक बार फिर सतह पर है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉण्‍ड की व्‍यवस्‍था खत्‍म करने को लेकर दी गई याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी राजनीतिक दलों को आदेश दिया है कि वे इस बॉण्‍ड के जरिए हासिल किए गए चंदे का विवरण सीलबंद लिफाफे में निर्वाचन आयोग को सौंपें। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉण्‍ड खत्‍म करने की मांग पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि चंदे के इस तरीके पर निर्वाचन आयोग को भी आपत्ति है। उसने यह आपत्ति तभी जताई थी, जब चुनावी बॉण्‍ड संबंधी कानून आकार लेकर रहा था, लेकिन तब सरकार की ओर से यह दलील दी गई कि नई व्‍यवस्‍था पहले से ज्‍यादा पारदर्शी होगी। यह मानने के अच्‍छे-भले कारण हैं कि ऐसा नहीं हुआ और चुनावी बॉण्‍ड की व्‍यवस्‍था कुल मिलाकर अपारदर्शी ही है। इसका कारण यह है कि राजनीतिक दल यह बताने के लिए बाध्‍य नहीं कि उन्‍हें किसने चुनावी बॉण्‍ड दिया? निर्वाचन आयोग और साथ ही चुनाव प्रक्रिया साफ-सुथरी बनाने के लिए सक्रिय संगठन यह चाह रहे हैं कि चुनावी बॉण्‍ड खरीदने वाले का नाम उजागर किया जाए, ताकि यह पता चल सके कि कहीं किसी ने किसी फायदे के एवज में तो चुनावी बॉण्‍ड के जरिए चंदा नहीं दिया नि:सदेह चुनावी बॉण्‍ड के जरिए चंदा देने वालों की गोपनीयता बनाए रखने के पक्ष में यह एक तर्क तो है कि उन्‍हें वे राजनीतिक दल परेशान कर सकते हैं, जिन्‍हें चंदा नहीं मिला लेकिन यह आशंका दूर की जानी भी जरूरी है कि कहीं किसी लाभ-लोभ के फेर में तो चुनावी चंदा नहीं दिया जा रहा फिलहाल यह कहना कठिन है कि चुनावी बॉण्‍ड भविष्‍य क्‍या होने वाला है, लेकिन लगता यही है कि इन बॉण्‍ड के जरिए चंदे का कानून बनने से हम एक अपारदर्शी व्‍यवस्‍था छोड़कर दूसरी अपारदर्शी व्‍यवस्‍था के दायरे में गए हैं। इसके पहले राजनीतिक दलों को 20 हजार रुपए से कम के चंदे का विवरण बताने की छूट थी। इसका जमकर दुरुपयोग हो  रहा था और कई राजनीतिक दल यह कहते थे कि उन्‍हें करोडा़ें रुपए का चंदा 20-20 हजार रुपए से कम में ही मिला। चुनावी बॉण्‍ड की व्‍यवस्‍था बनने के बाद छूट की यह सीमा दो हजार रुपए कर दी गई। राजनीति पैसे का खेल है। बिना धन के राजनीति और राजनीतिक दलों का संचालन नहीं किया जा सकता। यह किसी से छिपा नहीं छोटे-बड़े राजनीतिक दल चुनावों के दौरान पैसा पानी की तरह बहाते हैं। अगर चुनावी चंदे की पारदर्शी व्‍यवस्‍था नहीं बनती तो राजनीति के कालेधन से संचालित होने की आशंका को दूर नहीं किया जा सकता। विडंबना यह है कि राजनीतिक दल चुनावी चंदे की पारदर्शी व्‍यवस्‍था बनाने के लिए तो एकमत हैं और ही उत्‍साहित। चुनावी बॉण्‍ड संबंधी कानून बनते समय कई राजनीतिक दलों ने उसका विरोध तो किया था।  

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