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Sarode Online Typing Center Harda For CPCT

created Monday April 15, 09:42 by Anil Sarode


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एक कंजूस सेठ था। एक बार मुहरों से भरी उसकी थैली गुम हो गई। कंजूस सेठ को बहुत दु:ख हुआ। उसे अब खाना-पीना अच्‍छा नहीं लगता था। अंत में उसने नगरपति से फरियाद की। नगरपति ने गांव में ढिंढोरा पिटवाया- जो व्‍यक्ति मुहरों से भरी थैली ढूंढकर लाएगा उसे दस मुहरें इनाम में मिलेंगी। वह थैली एक किसान को‍ मिली। किसान उसे लेकर कंजूस सेठ के पास गया। उसने थैली कंजूस को दी और अपना इनाम मांगा। थैली में मुहरें गिनने बाद कंजूस बोला- भैया, तुम तो काफी समझदार लगते हो। अपने इनाम की दस मुहरें तो तुमने पहले ही निकाल ली। कोई बात नहीं वैसे भी मैं तुम्‍हें दस मोहरें देने वाला था। किसान बोला- किन्‍तु थैली तो मैंने खोली ही नहीं। कंजूस ने कहा- इस थैली में एक सौ दस मुहरें थीं। अभी इसमें सौ महुरें ही है। ऊपर से दस मुहरें कहाँ गई? अंत में दाेनों नगरपति के पास फरियाद लेकर पहुंचे। नगरपति ने थैली अपने पास रख ली और कंजूस सेठ से पूछा- तुम्‍हारी थैली में कितनी मुहरें थी? कंजूस सेठ बोला- एक सौ दस मुहरें। नगरपति ने थैली जमीन पर उलट दी और सबस सामने मुहरें गिनीं। पूरी सौ मुहरें थी। नगरपति ने किसान से पूछा- इस थैली में से तुमने कितनी मुहरें निकाली हैं? किसान ने कहा- मैंने थैली खोली भी नहीं जैसी मिली थी, वैसे ही सेठजी को लौटा दी थी। नगरपति बोले- देखिए सेठजी ! आपकी थैली में आपके कहे अनुसार एक सौ दस मुहरें थीं। जब कि इस थैली में केवल सौ मुहरें हैं। इसका मतलब यह है कि यह थैली आपकी नहीं है। आपकी खोई थैली को खोजने का काम जारी रखा जाएगा। यह कहकर नगरपति ने थैली किसान को सौप दी। फिर वे किसान से बोले- लो भैया, तुम्‍हारी सच्‍चाई का इनाम। कंजूस सेठ मुँह लटकाए खाली हाथ घर लौटा।

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