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RAJPUT ONLINE TYPING INSTITUTE KESHAV COLONY MORENA BY J2B2

created May 15th, 11:32 by RAJPUT2


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किसी भी सरकार के लिए भरोसा सबसे बड़ी पूंजी होती है। आधिकारिक तथ्‍याें पर भरोसा करके ही सारे कामकाज निपटाए जाते हैं। सिर्फ राष्‍ट्रीय, बल्कि अंतरराष्‍ट्रीय कारोबारी और नीति नियंता सरकारी आंकड़ों के आधार पर ही योजनाएं बनाते और उन्‍हें मूर्त रूप देते हैं। ऐसे में यदि सांख्यिकी विभाग द्वारा जारी किए गए तथ्‍यों पर सवाल खड़े हो जाएं तो बड़ा संकट उत्‍पन्‍न हो सकता है। भारत सरकार के राष्‍ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय ने यह खुलासा करके हंगामा मचा दिया है कि 'नई श्रंखला' में सकल घरेलु उत्‍पाद (जीडीपी) की गणना के लिए मंत्रालय के पोर्टल से जिन कंपनियों को शामिल किया गया है उनमें करीब एक तिहाई का कहीं        अता -पता नहीं है। इस पर विवाद शुरू हो गया है कि क्‍या ऐसा करने से जीडीपी के आंकड़ों को बढ़ाकर दिखाया जा सकता है? सरकार का दावा है कि इन कंपनियों के आंकड़ों को शामिल करने के बाबजूद जीडीपी के आकलन में कोई गड़बड़ी नहीं है। हालांकि सरकार ने इस मामले का अध्‍ययन करने की बात भी कही है।इस मुद्दे पर राजनीति गरमा जाना स्‍वाभाविक है। पूर्व वित्‍तमंत्री पी.चिदंबरम ने तो सरकार पर जीडीपी अनुमान को ज्‍यादा दिखाने के लिए केन्‍द्रीय सांख्यिकी मंत्रालय पर आंकड़ों में जानबूझकर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है। सरकार के दावों के विपरीत एनएसएसओ के रोजगार आंकड़ों पर पहले भी हंगामा हो चुका है। जीडीपी को लेकर सरकार के आंकड़ों पर सबसे पहले शक उस समय व्‍यक्‍त किया गया था जब 2015 में 'नई श्रंखला' के आंकड़े पहली बार जारी किए गए। जब जीडीपी की गणना के लिए उत्‍पादों से व्‍यापक सर्वेक्षण के स्‍थान पर कंपनियों के लाभ को शामिल किया गया। वैसे तो कुछ विशेषज्ञ इसे ज्‍यादा वैज्ञानिक तरीका मानते है क्‍योंकि कंपनी मामलों के मंत्रालय के पास कंपनियाें की वित्‍तीय गतिविधियाें के आंकड़े आसानी से उपलब्‍ध होत हैं। लेकिन एनएसएसओ का यह खुलासा कि इन आंकड़ों में शामिल एक तिहाई कंपनियां फर्जी हैं। एक बारगी जीडीपी की पूरी गणना पर सवाल खड़े कर रहा है। भारतीय सांख्यिकी विभाग के आंकड़ों पर पहले कभी ऐसे सवाल खड़े नहीं हुए थे। यह संदेह ऐसे समय प्रकट हो रहा है जब अर्थिक विकास और रोजगार, चुनाव में राजनीतिक मुद्दे बने हुए हैं। भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के भविष्‍य को लेकर तरह-तरह की आशंकाओं के करण विदेशी निवेशक पूरी तरह निश्चित नहीं हो पा रहे है।

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