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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || CPCT_Admission_Open

created Wednesday May 15, 11:43 by ddayal2004


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एक जमाने की बात है, एक जंगल हुआ करता था, जिसमें एक लोमड़ी रहती थी, और एक बकरी रहती थी। बकरी स्‍वभाव से काफी रहेम दिल भोली थी। बकरी अपना सारा वक्‍त खाना खोजने में बिताती थी, और लोमड़ी अपने चतुर चालाक स्‍वभाव की मालिक थी, वो भी पूरा दिन अपना पेट भरने के लिए यहा वहा भटकती रहती थी, जंगल छोटा होने के कारण हर एक जानवर एक दूजे को जानते थे। उसी जंगल मे एक शेर भी था, जो काफी आलसी थ, उस बूढ़े शेर को शिकार खाना पसंद था पर करना नहीं, इस लिए उसकी सारी शेरनिया उसे दिन भर गालिया देती और काटती रहती थी, ये शेर जंगल का राजा नाम का ही था, बाकी उसकी हालत खुजली वाले कुत्‍ते से भी बत्‍तर थी। एक दिन भी सुबह सुबह लोमड़ी शिकार के लिए निकली, लोमड़ी को खरगोश का शिकार मिल ही गया था, पर तभी पेड़ के ऊपर बैठे बंदर ने चिल्‍ला कर लोमड़ी के शिकार खरगोश को भगा दिया, लोमड़ी बंदर को गालियां देते देते आगे बढ़ गयी, आगे जाने पर लोमड़ी को एक और शिकार नज़र आता है, इस बार एक परिंदा पकड़ने के लिए लोमड़ी दौड़ लगाती है, पर बदकिस्‍मती से रास्‍ते पे पड़े गधी के गोबर पे पाव पड़ने से लोमड़ी फिसल जाती है, और खड्डे में जा के गिर जाती है, खड्डे मे से बाहर आने के लिए लोमड़ी बहुत प्रयास करती है, पर कोई फायदा नहीं होता, खड्डा थोड़ा गहरा होता है,वही दूसरी और शेरनियों ने अपने कामचोर जानम शेर को मुफ्त का शिकार खिला ने से मना कर दिया, और बकुरी तरह काट काट कर झूंड से भगा दिया। शेर भूखा प्‍यासा शिकार करने की कोशिस करता है, पर लंबे वक्‍त से बैठे बैठे खाने की वजह से शरीर भारी हो जाता है, तो एक भी शिकार हाथ नहीं आता है, रात हो जाती है लोमड़ी खड्डे में पड़ी सोच रही होती है के आज किस कंबक्‍त का मुह देख दिया था, जो पूरे दिन की पनवती लगी है, और अब जान यहा खड्डे में फसी है, अंधेरे में लोमड़ी को किसी के खुर की आवाज़ आती है, लोमड़ी सोचती है के अगर शेर या चीता हुआ तो आज राम नाम सत्‍य। पर खुशकिशमती से वो बकरी होती है। बकरी लोमड़ी को खड्डे में गिरा देख्‍, तुरंत मदद करने दौड़ती है, और ओंधे मुह वेा भी खड्डे मे गिर जाती है, लोमड़ी कुछ बोले बिना बकरी को देखती रहती है, फिर गुस्‍से मे लाल पीली हो कर बकरी पे चिल्‍लाती है, कि तुझे दिमाग है के नहीं, जब पता है के मे यहा अंदर गिरी पड़ी हु तो आव या ताव देखे बिना मेरे सिर पे गिर ने की वजाय किसी से मदद लाती। बकरी बोली तुम्‍हें तकलीफ में देख में मदद करने आई थी।

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