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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || CPCT_Admission_Open

created May 15th, 11:55 by Vivek Sen


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एक बार किसी मंत्री से मिलने गया था। बाहर काफी देर इंतजार करना पड़ा। फिर प्‍यून से निवेदन किया। उसने मंत्रीजी से मिलाने के लिए कुछ रकम मांगी और कहा कि मंत्री तो आते-जाते रहते हैं,  मैं तो यहीं रहूंगा, और हमेशा आपके काम आऊंगा। अपने देश में मंत्रियों या पार्टियों के बदलने से बहुत कुछ नहीं बदलता है क्‍योंकि नौकरशाही पहले की तरह बनी रहती है। असर नेताओं से सुनने को मिलता है कि उनकी नीतियों को नौकरशाही फेल कर देती है। स्‍पष्‍ट उदाहरण नोटबंदी का है, जब बैंक के अधिकारियों ने पुराने नोटों को बदल कर सरकार की नीति को फेल कर दिया था। आने वाली सरकार को कुछ ऐसे उपाय करने होंगे नौकरशाही जनता के लिए उपयोगी बन सके।
    पहला उपाय है कि संवैधानिक पदों पर जिन व्‍यक्तियों को नियुक्‍त किया जाता है उनकी उपयुक्‍तता पर सार्वजनिक बहस हो। चीफ विजिलेंस कमिश्‍नर, कंट्रोलर एवं ऑडिटर जनरल, चीफ इलेकशन कमिशनर आदि ऐसे पद हैं, जो शासन-व्‍यवस्‍था को सही दिशा देते हैं। वर्तमान में इनमें से कुछ की नियुक्ति करने वाली कमेटी में विपक्ष के नेता को सदस्‍य बनाया जाता है, लेकिन जिन व्‍यक्तियों को इन पदों पर नियुक्‍त किया जाता है उनके कार्यकलापों और चरित्र पर सार्वजनिक बहस नहीं होती। इस मामले में हमें अमेरिका से सीख लेने की जरूरत है। वहां ऐसे पदों पर नियुक्ति के लिए संबंधित व्‍यक्ति को राष्‍ट्रपति मनोनीत करता है। उसके बाद संसद की एक कमेटी उस व्‍यक्ति का साक्षात्‍कार लेती है। संसदीय समिति की सहमति होने पर ही उस व्‍यक्ति की नियुक्ति मानी जाती है अन्‍यथा राष्‍ट्रपति किसी और व्‍यक्ति को मनोनीत करता है। ऐसा करने से सही व्‍यक्ति के मनोनीत होने की संभावना बढ़ जाती हैं।

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