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ROYAL DEEP TYPING TEST SERIES PART-5 MORENA {MADHYA PRADESH}

created May 15th, 11:59 by devesh singh


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असहयोग आन्‍दोलन के आव्हान का सम्‍पूर्ण देश की जनता पर बड़ा व्‍यापक प्रभाव हुआ तथा अनगिनत लोगों ने आन्‍दोलन में भाग लिया। सर्वत्र लोगों ने आन्‍दोलन को इस प्रकार भाग लिया मानो वे किसी धार्मिक अनुष्‍ठान ने भाग ले रहे हों। सैकड़ों भारतीय ने अपनी उपाधियॉं वापस की मजिस्‍ट्रेटों ने त्‍यागपत्र दिए, वकीलों ने अदालतें छोड़ी तथा विद्यार्थियों ने शिक्षा संस्‍थानों का त्‍याग किया। अनेक राष्‍ट्रीय शिक्षालयों की स्‍थापना की गई। नवीन एक्‍ट के तहत् बनी व्‍यवस्‍थापिका सभाओं का भी यथासम्‍भव बहिष्‍कार किया गया। विदेशी वस्‍तुओं का बहिस्‍कार तथा मद्य निषेध भी किया गया। राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवकों का संगठन किया गया तथा तिलक स्‍वराज्‍य कोष नाम का एक कोष खोला गया।
    फिर भी यह एक तथ्‍य रहा कि आन्‍दोलन के कार्यक्रम का विरोधात्‍मक पक्ष अधिक सफल नहीं रहा। पुनर्गठित व्‍यवस्‍थापिका सभाओं के चुनाव हुए। उनके 784 स्‍थानों के लिए लगभग 2,000 प्रत्‍याशियों ने चुनाव लड़ा। केवल 6 स्‍थानों पर प्रत्‍याशियों के अभाव में चुनाव नहीं हो सके। अनेक अवसरवादी व्‍यवस्‍थापिकाओं  में पहुँचे। सकररी कॉलेज, अदालतें कार्यालय भी चलते रहे। प्राय: आन्‍दोलन अहिंसक रहा। यद्यपि कहीं-कहीं सरकारी अधिकारियों से हिंसापूर्ण संघर्ष भी हुआ।
    प्रारम्‍भ में सरकार ने आन्‍दोलन को कोई महत्‍व नहीं दिया, परन्‍तु थोड़े दिनों में सरकार की नींद हराम होने लगी। परिणाम स्‍वरूप सरकारी दमनचक्र का दौर चला और हजारों भारतीय जेल में भर दिए गए। सरकार की दमन नीति के फलस्‍वरूप मालेगॉंव, ग‍िरिडीह, असम आदि में दंगे हुए। जुलाई 1921 की कांग्रेस समिति की बैठक ने प्रिन्‍स ऑफ वेल्‍स का जो उस समय भारत आने वाले थे, बहिष्‍कार किए जाने तथा उनके आगमन पर हड़ताल करने का निश्‍चय किया गया।
    प्रिंस ऑफ वेल्‍स के भारत में आने पर बम्‍बई में दंगा हुआ, जिसमें अनेक व्‍यक्ति घायल हुए तथा मारे गए। गांधीजी आन्‍दोलन में हिंसा का प्रवेश नहीं चाहते थे। अत: उन्‍होंने आन्‍दोलन को उस समय तक के लिए स्‍थगित कर दिया, जब तक देश अहिंसात्‍मक आन्‍दोलन के चलाने योग्‍य हो जाए। 1 फरवरी, 1922 को गांधीजी ने एक पत्र वायसराय को लिखा और सरकार को सूचित कर दिया कि 7 दिवस में सरकारी नीति में परिवर्तन नहीं हुआ, तो सविनय अवज्ञा आन्‍दोलन प्रारम्‍भ कर दिया जाएगा और बारदोली उसके श्रीगणेश का स्‍थान होगा।
 

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