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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || CPCT_Admission_Open

created Jun 11th, 10:15 by Deendayal


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कलाकार विचारक होना ही चाहिए। उसके बिना उसका विकास नहीं हो सकता। कलाकार के पास जो जन्‍मजात कला का वरदान होता है, वह उसकी शत्रु भी साबित हो सकती है। लगातार परिपक्‍व होना, खुद का आकलन करते रहना कलाकार के लिए बहुत जरूरी है। उसके लिए अपने आसपास की परिस्थिति का अहसास होना और उस पर विचार करना अपरिहार्य है। अपने वैचारिक रुख पर दृढ़ता से डटे रहना महत्‍वपूर्ण है। खुद का नुकसान झेलने के लिए भी तैयार रहना पड़ता है। इन्‍हीं सिद्धांतों पर पूरा जीवन बिताने वाले ज्ञानपीठ पुरस्‍कार से सम्‍मानित रंगकर्मी, अभिनेता, नाटककार और निर्देशक गिरीश रघुनाथ कर्नाड लंबी बीमारी के बाद सोमवार को हमसे विदा हो गए। कर्नाड भारतीय रंगभूमि की सशक्‍त आवाज थे।
    स्‍वतंत्रता के बाद जीवन के सभी क्षेत्रों में भारतीयता की खोज शुरू हुई। अपनी जड़ों की ओर लौटने का एक आंदोलन-सा शुरू हो गया। रंगभूमि में भारतीयता की खोज करने और उसे आधुनिक रूप देने का ठोस प्रयास जिन नाटककारों ने किया उनमें कर्नाड अग्रणी थे। अपने पहले नाटक से ही उन्‍होंने लगातार भारतीय राजनीति, समाज व्‍यवस्‍था, जाति व्‍यवस्‍था धर्म व्‍यवस्‍था पर टिप्‍पणी की है। यद्यपि, हयवदन, नागमंडल, तुगलक जैसे नाटकों में उन्‍होंने चाहे मिथक, इतिहास अथवा पुराणों की कथाओं का आधार लिया हो पर इन कथाओं की सिर्फ मनोरंजक प्रस्‍तुति में उनकी बिल्‍कुल रुचि नहीं थी। इसके विपरीत उन्‍होंने इन शुरुआती नाटकों के जरिये समकालीन मुद्दों और समस्‍याओं को ही सामने रखने का प्रयास किया। आयु के 75 साल पूरे करने के बाद भी कर्नाड सक्रिय रहे। उन्‍होंने अपने विचारों को कभी छिपाने का प्रयास नहीं किया। देश में बढ़ती असहिष्‍णुता पत्रकारों पर हो रहे हमलों के खिलाफ उन्‍होंने निडरता से आवाज उठाई। बहुभाषी और बहुआयामी व्‍यक्तित्‍व के मालिक कर्नाड ने चार दशकों तक नाट्यलेखन, निर्देशन और अभियन से रंगभूमि को गुलजार रखा। उनके नाटकों का हिंदी, कन्‍नड, मराठी और अंग्रेजी जैसी विविध भाषाओं में अनुवाद हुआ। नया दृष्टिकोण देने वाले और अलग शैली के उनके नाटकों को दर्शकों ने अच्‍छा प्रतिसाद दिया। 1964 में रंगभूमि पर आए उनके नाटक तुगलक ने इतिहास बनाया। इस नाटक ने उन्‍हें देशभर में मशहूर कर दिया। उन्‍हें 1988 में साहित्‍य के सर्वोच्‍च पुरस्‍कार ज्ञानपीठ से सम्‍मानित किया गया।

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