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Sarode Online Typing Center Harda For CPCT

created Tuesday June 11, 10:34 by Anil Sarode


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बादशाह अकबर को शिकार में काफी दिलचस्‍पी थी इसलिए उन्‍होंने अपने शिकार के शौक को पूरी करने के लिए कुछ गाँव उजड़वाकर एक जंगल सुरक्षित करवा दिया था। जब कभी उनकी इच्‍छा होती, अपने साथ कुछ सैनिकों को लेकर वे जंगल में जाते और आखेट कर संध्‍या को घर लौट आते। उस जंगल में बादशाह के सिवा कोई दूसरा व्‍यक्ति शिकार नहीं कर सकता था। इसलिए उसके चारों ओर पहरा बैठा दिया था। एक दिन बादशाह एक बड़े लश्‍कर के साथ उस जंगल में गए। जंगल में एक स्‍थान पर तोतों के दो दलों में भयंकर युद्ध चल रहा था। बादशाह को देखकर उनकी लड़ाई रुक गई और वे अपने-अपने पेड़ों पर बैठ गए और एक दूसरे को कुछ-कुछ कहने लगे। इस लड़ाई को देखकर बादशाह को बड़ा आश्‍चर्य हुआ। उसका भेद जानने के लिए लालयित हाेकर उन्‍होंने बीरबल से पूछा, बीरबल तुम काफी समझदार हो, हमने सुना है कि तुमने पशु-पक्षियों की भाषा भी सीखी है और तुम उनके रहन-सहन से भी परिचित हो। हमें बताओ कि इन तोतों की दलबन्‍दी और युद्ध किसलिए हो रहा है? बीरबल को गाँव उजाडने वाली याद गई। उन्‍होंने इस मौके का लाभ उठाने की सोची। वे बोले, गरीब परवर! इसका उत्‍तर कुछ कड़वा है। अगर आप नाराज हों तो मैं कहूँ? एक बार अकबर के दरबार में एक विदेशी आया। उसने बादशाह अकबर के सामने एक चुनौती रखी, आप लोग मेरी मातृभाषा बताइए या फिर स्‍वीकार कर लीजिए कि आपके यहाँ सब मूर्ख हैं।

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