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CPCT जैसी कठीन टेस्‍ट By Rohit Salve

created Tuesday June 11, 16:32 by Rohit Salve


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दिल्ली को राजधानी बनाने का ऐलान 12 दिसंबर 1911 को हुआ था। तब भारत के शासक किंग जॉर्ज पंचम ने दिल्ली दरवार में इसकी आधारशीला रखी थी। बाद में ब्रिटिश आर्किटेक्ट सर हरर्बट बेकर और सर एडविन लुटियेस ने नए श‍हर की योजना बनाई थी। इस योजना को पूरा करने में दो दशक लग गए। इसके बाद 13 फरवरी 1931 को आधिकारिक रूप से दिल्ली की राजधानी बनी। इतिहासकारों का मानना है दिल्लील शब्दा फारसी के देहलीज से आया है क्योंकि दिल्ली गंगा के तराई इलाकों के लिए एक देहलीज थी। कुछ लोगों का मानना है कि दिल्ली  का नाम तोमर राजा ढिल्लू  के नाम पर पड़ा। एक अभिशाप को झूठा सिद्ध करने के लिए राजा ढिल्लू ने इस शहर की बुनियाद में गडी एक कील को खुदवाने की कोशिश की। इस घटना के बाद उनके राजपाट का तो अंत हो गया लेकिन मशहूर हुई एक कहावत, किल्ली तो ढिल्ली भई, तोमर हुए मतीहीन जिससे दिल्ली को उसका नाम मिला। 12 दिसंबर 1911 को ब्रिटिश राज के सबसे बडे तमाशे दिल्ली दरबार में पहली बार किंग जॉर्ज पंचम अपनी रानी क्वीन मैरी के साथ मौजूद थे। उन्होंदने अस्सी हजार लोगों की मौजूदगी में घोषणा की, हमें भारत की जनता को यह बताते हुए बेहद हर्ष हो रहा है कि सरकार और उसके मंत्रियों की सलाह पर देश को बेहतर ढंग से प्रशासित करने के लिए ब्रिटिश सरकार भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थाहनांतरित कर रही है। तब दिल्ली बहुत पिछडी थी। बॉम्बे, कलकत्ता और मद्रास जैसे महानगर हर बात में काफी आगे थे। यहां तक कि लखनउ और हैदराबाद भी दिल्ली से बेहतर माने जात थे। दिल्ली की महज तीन फीसदी आबादी अंग्रेजी पढ पाती थी। यही कारण है कि विदेशी भी बहुत कम आते थे। मेरठ की तुलना में भी दिल्ली। में काफी कम विदेशी आते थे। हालात इतने खराब थे कि आदमी वहां पैसा लगाने को तैयार नही था, लेकिन भौगोलिक आकार से देश के मध्यर में होने के कारण दिल्लीथ को राजधानी बनाने का ऐलान हुआ। दो दशक तक इसे विकसित किया गया। तब दिल्ली के प्रेट्रोल तीस पैसे लीटर था। लेकिन वाहन तेजी से चलाने पर सौ रूपए तक अर्थदंड वसूला जाता था। यह तेज गति थी 19 किमी प्रति घंटा। दिल्ली में बर्मा ऑइल कंपनी प्रेट्रोल बांटती थी। किंग जॉर्ज पंचम के उस दौरे के बाद से पोस्ट ऑफिस से फोन करने की सुविधा मिली थी। हालांकि चुनिंदा रईस लोग ही फोन लगाते थे, लेकिन खास बात यह थी कि तीन मिनट के कॉल के चार आने यानी 25 पैसे लगते थे।

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