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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || CPCT_Speed_Test ☺

created Wednesday June 12, 11:57 by ddayal2004


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जल-जंगल और जमीन की समस्‍या, गरीबी और बेरोजगारी की समस्‍या, भुखमरी और कुपोषण की समस्‍या तथा वायु, जल मृदा और ध्‍वनि प्रदूषण की समस्‍या का मूल कारण प्राकृतिक संसाधनों का बढ़ता दोहन है, जो सीधे-सीधे बढ़ती आबादी से जुड़ा मसला है। भारत में इस विशाल आबादी के कारण ही अनेक समस्‍याएं विकराल रूप धारण करती जा रही हैं। अंतरराष्‍ट्रीय रैंकिंग में भारत की दयनीय स्थिति का मुख्‍य कारण भी यह विकरात जनसंख्‍या ही है।
    ग्‍लोबल हंगर इंटेक्‍स में हम 103वें स्‍थान पर, साक्षरता दरा में 168वें स्‍थान पर, वर्ल्‍ड हैपिनेस इंडेक्‍स में 133वें स्‍थान पर, ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्‍स में 130वें स्‍थान पर, एनवायरनमेंट परफॉरमेंस इंडेक्‍स में 177वें स्‍थान पर तथा प्रति व्‍यक्ति जीडीपी में 139वें स्‍थान पर हैं, लेकिन धरती से पानी निकालने के मामले में हम दुनिया में पहले स्‍थान पर हैं, जबकि हमारे पास कृषि योग्‍य भूमि दुनिया की दो फीसद तथा पीने योग्‍य पानी मात्र चार फीसद है। प्रदूषण नियंत्रण को लेकर पिछले पांच वर्षों में बहुत से प्रयास भी किए गए हैं, लेकिन जनसंख्‍या विस्‍फोट के कारण वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण और ध्‍वनि प्रदूषण बढ़ता जा रहा है और इसका मूल कारण भी जनसंख्‍या विस्‍फोट है।

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