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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || CPCT_Admission_Open {संचालक-बुद्ध अकादमी टीकमगढ़}

created Jul 11th, 05:34 by Subodh Khare


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विगत सोमवार लोकसभा में प्रजातंत्र के लिए एक सुखद स्थिति देखने को मिली जब सत्‍तापक्ष के दो कद्दावर सांसदों ने अपनी ही सरकार के मंत्री के बयान की कलई खोल दी। क्‍या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस परम्‍परा को सकारात्‍मक भाव से लेंगे ताकि सरकार की गलतियों को जन‍प्रतिनिधि संसद में उजागर कर सकें। हुआ यूं कि बिहार के छपरा से सांसद राजीव प्रताप रूड़ी और मथुरा की सांसद हेमा मालिनी ने केन्‍द्रीय पर्यटन मंत्री के रवैये से क्षोभ व्‍यक्‍त करते हुए बताया कि इन दोनों क्षेत्रों को पर्यटन स्‍थल में बदलने के प्रयासों में केंद्र कोताही कर रहा है। रूड़ी ने कहा कि केंद्र सरकार विश्‍वविख्‍यात सोनपुर मेले को बेहतर पर्यटन स्‍थल में बदलने के लिए अपेक्षित धन मुहैया नहीं करा रही है। कुछ ऐसा ही भाव सांसद हेमा मालिनी ने भी मथुरा-वृन्‍दावन को लेकर व्‍यक्‍त किया। इस पर जब मंत्री प्रहलाद पटेल ने बचाव में कहा कि बिहार सरकार से डीपीआर नहीं भेजी गई है तो सांसद इस जवाब सें इतने नाराज हुए कि उन्‍होंने संसद में ही डीपीआर की प्रति लहराई और कहा कि यह विशेषाधिकार का मामला बनता है। इसके पहली भी रूड़ी संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद के सरकार की प्रशंसा वाले एक बयान की हकीकत बता चुके हैं। नेहरू काल में महावीर त्‍यागी सरीखे अनेक कद्दावर नेता नेहरू की नीतियों की कटु आलोचना करते थे लेकिन, नेहरू आलोचना को सकारात्‍मक भाव से लेते थे। भारत की आजादी का एक किस्‍सा याद आता है कि जब ब्रिटिश हाउस ऑफ लॉर्ड्स में चर्चित के कहने पर उनकी कंजर्वेटिव पार्टी इंडिया इंडिपेंडेंस बिल का विरोध कर रही थी। उसी दल के एक बेहद सम्‍मानित नेता लार्ड हेलिफैक्‍स ने भारत को आजादी देने के पक्ष में एक अति-भावनात्‍मक भाषण दिया और जिससे प्रभावित होकर पूरे दल ने इस बिल के समर्थन में मत देकर इसे पारित कराया।  

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