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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || CPCT_Admission_Open

created Tuesday August 13, 12:29 by Vivek Sen


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इस बार महाराष्‍ट्र, गुजरात से लेकर कर्नाटक और केरल तक में बाढ़ से जो तबाही मची है उससे यह तो साफ है कि मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी के बावजूद सरकारों ने बचाव के शायद ही कोई पर्याप्‍त उपाय पहले से किए हों। पिछले चार दिनों में इन राज्‍यों में हुई भारी मानसूनी बरसात ने ऐसा कहर बरसाया कि ज्‍यादातर जगहों पर राष्‍ट्रीय राजमार्ग तक पांच-छह फीट पानी में डूब गए। गांव के गांव जलमग्‍न है। हल्‍दी की खेती के लिए मशहूर महाराष्‍ट्र के सांगली जिले की हालत तो बहुत खराब है। इस जिले के कई गांव बीस-बीस फुट पानी में डूब गए हैं। इन राज्‍यों में बाढ़ से मरने वालों का सरकार आंकड़ा दो सौ से ऊपर है। बघेरों की तादाद तो लाखों में है। सांगली और कोल्‍हपुर जिलाें में बाढ़ के पानी की निकासी बढ़ाने के लिए कर्नाटक ने अलमाटी बांध से भारी मात्रा में पानी छोड़ा है। गुजरात में नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोबर बांध के तीस में से छब्‍बीस गेट खोलने पड़ गए। हालत यह है कि केरल, के चौदह, कर्नाटक के अठारह, महाराष्‍ट्र के ग्‍यारह और गुजरात के सात जिले भयानक बाढ़ की चपेट हैं ओर इन जिलों में रेड अलर्ट जारी किया चुका है। कुछ इलाके तो ऐसे हैं जहां पहली बार बाढ़ आई है। हालांकि सभी सरकारों ने बचाब और राहत कार्य शुरू तो किए हैं लेकिन वे ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहे हैं। ऐसे में ज्‍यादातर बाढ़ग्रस्‍त इलाकों, खासतौर से ग्रामीण इलाकों में बाढ़ के लोग पानी में फंसे हैं।  
ऐसा नहीं है कि बाढ़ कोई अनायास ही आई। मौसम विभाग ने भारी बारिश को लेकर पहले ही चेतावनी जारी कर दी थी। इस बात का अनुमान शायद सरकार को नहीं रहा होगा कि लगातार मूसलाधार बारिश से नदियां उफान कर बड़े इलाकोें में फसलों को अपनी चपेट में ले लेंगी। हालात इसी से बिगडे। सांगली में तो पांच-छह घंटे की भारी बारिश में समंदर जैसे हालात बन गए। अभी समस्‍या यह है कि ज्‍यादातर राज्‍यों में लोगों को बाढ़ ग्रस्‍त क्षेत्रों से सुरक्षित निकालने का भी बंदोबस्‍त नहीं हो पाया है। जाहिर है राज्‍यों के पास बाढ़ जैसी आपदा से निपटने के स्‍थायी और पर्याप्‍त इंतजाम नहीं हैं।  

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