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बंसोड टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा, छिन्‍दवाड़ा मो.न.8982805777 सीपीसीटी न्‍यू बैच प्रांरभ

created Aug 13th, 14:13 by Sawan Ivnati


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जब परमात्‍मा इस सृष्टि पर अवतरित होते हैं तो वो हमें ज्ञान, प्‍यार और शक्ति देते हैं। परमात्‍मा से ज्ञान लेकर आत्‍मा को प्रतिज्ञा करनी होती है कि उस ज्ञान का जीवन में इस्‍तेमाल करना है। उस प्रतिज्ञा से हम बंधे हुए हैं। इस प्रतिज्ञा को जो आत्‍मा पूरा करेगी वह स्‍वयं की रक्षा होते हुए देख सकती है। जीवन की इस यात्रा पर इतने सारे लोग मिलते हैं जो कहते हैं कि वो डिप्रेशन से बाहर गए, कोई कहता है हम डिवोर्स के लिए सोच रहे थे लेकिन आज हम दोनों साथ-साथ रह रहे हैं। आज हमारा रिश्‍ता पहले से अच्‍छा हो गया। कुछ तो ऐसे भी भाई-बहन मिलते हैं जो कहते हैं कि हम सुसाइड तक पहुंच गए थे, लेकिन हम बच गए। किससे बच गए, हम अपनी ही सोच से बच गए ना। अधिकांश लोग यह कहते हैं कि हमारा सोचने का तरीका बदल गया। इसका मतलब है कि वे पहले से कहीं ज्‍यादा पावरफुल हो गए। यह एम्‍पावरमेंट कैसे हुआ? परमात्‍मा से हमने जो ज्ञान लिया था उसको इस्‍तेमाल करने की प्रतिज्ञा की। इतनी सारी हमारी आदतें हैं जिनको हम छोड़ नहीं पा रहे हैं, जैसे-खाने की, पीने की, टीवी देखने की, कम्‍प्‍यूटर पर कितनी देर बैठना है, ये आदतें हम छोड़ नहीं पाते क्‍योंकि हम अपने आपको बंधन में नहीं बांधते हैं। बंधन यानी अनुशासन। मर्यादाओं का भी बंधन होता है, जो बड़ा महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि इसमें सिर्फ सुरक्षा समाई हुई। यह एक ऐसा बंधन है जो बड़ा प्‍यारा लगता है, जिसे रक्षाबंधन कहते हैं। अब आज के वक्‍त में त्‍यौहार की संभावनाएं बदल गई हैं। इनके पहलुओं में बहुत अंतर गया है। आज अपने आपको इतना शक्तिशाली बनाना है कि वो आत्‍मा अपनी रक्षा खुद  कर सके। यह रक्षा हमारी अपने आपसे है। जैसे कहते हैं मन ही हमारा मित्र है तो मन ही हमारा शत्रु भी है। नकारात्‍मक विचार हमारे दुश्‍मन हैं, जैसे दुखी होने का संस्‍कार भी हमारा कितना बड़ा दुश्‍मन है। परमात्‍मा आकर हमें ये जो धागा बांधते हैं वो है ज्ञान का धागा। जो आत्‍मा, परमात्‍मा के ज्ञान और प्‍यार के धागे में बंध जाती है उस आत्‍मा की रक्षा हो जाती है।  

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