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बंसोड टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा, छिन्‍दवाड़ा मो.न.8982805777 सीपीसीटी न्‍यू बैच प्रांरभ

created Wednesday August 14, 01:37 by SARITA WAXER


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देश में प्रति वर्ष दो लोख बालक विभिन्‍न अपराधों के कारण गिरफ्तार किए जाते हैं। बाल अपराधों के संदर्भ में अनेक प्रश्‍न उपस्थित होते है, जैसे- इन अपराधों के पीछे क्‍या कारण है ? अधिकतर बाल अपराधी किस आयु के होते है ? इन अपराधों के लिए जिम्‍मेदार कौन है तथा कानून का दृष्टिकोण क्‍या है ? क्‍या बाल अपराधी जेल में रखे जाना चाहिये बाल अपराध सम्‍बन्‍धी कानून ने कौनसी नई शुरूआत की है ? यह बात देखी गई है कि बालकों की आयु-वृद्धि के साथ अनका अपराध प्रतिशत भी बढ़ता जाताहै। 7 से 12 वर्ष वाले बच्‍चों में अपराध प्रतिशत कम नहीं है। बच्‍चों के अपराध के लिए वे परिस्थितियां तथा वातावरण दोषी है जो उसे अपराधी बनाने के लिए विवश करती है। यदि हमें इस अपराध-वृत्ति को नियंत्रित करना है तो 7 से 12 वर्ष के बच्‍चों को उचित परिस्थिति एवं वातावरण देना होगा ताकि उनका सामान्‍य विकास हो सके। हमें यह भी देखना होगा कि उन्‍हें अपराध-वृत्ति की ओर धकेलने के लि वास्‍तव में जिम्‍मेदार कौन है।  
वास्‍तव में बाल अपराधों की बढ़ोतरी के लिए वैसे तो समाज का प्रत्‍येक वर्ग जिम्‍मेदार है परन्‍तु इसके लिए शिक्षक और अभिभावक की जिम्‍मेदारी अधिक है। आज शिक्षक को इससे कोई सरोकार नहीं कि छात्र आज स्‍कूल क्‍यों नहीं आया। अभिभावक भी वर्तमान आर्थिक युग में बच्‍चों पर अधिक ध्‍यान नहीं दे पाते कि बच्‍चा स्‍कूल मे जाकर पढ़ता है या नहीं। बाल अपराध के निवारण में परिवार एवम् अध्‍यापक की अहम् भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।
 

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