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साँई टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा (म0प्र0) सीपीसीटी न्‍यू बैच प्रारंभ संचालक- लकी श्रीवात्री मो.नं. 9098909565

created Aug 14th, 03:49 by Jyotishrivatri


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भारत दुनिया के ऐसे देशों में शामिल है जहां बड़ी तेजी से बदलाव हो रहे है, और उन बदलावों का माध्‍यम बन रही है शिक्षा। हम देखे तो पिछले दशकों में प्राथमिक शिक्षा के स्‍तर पर नामांकन में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। उच्‍च शिक्षा में भी नामांकन बढ़े है लेकिन नामांकन बढ़ने के अलावा भी शिक्षा के कई पहलू है, जिन पर विस्‍तार से बात करना जरूरी है। मसलन, शिक्षा के स्‍वरूप का प्रश्‍न, शिक्षा की गुणवता का प्रश्‍न, शिक्षा और ज्ञान के संबंध का प्रश्‍न, शिक्षा और रोजगार के संबंध का प्रश्‍न।  
आंकड़े गवाह है कि भारत में शिक्षित युवाओं की संख्‍या में लगातार इजाफा हो रहा है। शिक्षा अब अमीर और शहरी लोगों तक सीमित नहीं रह गई। गांव और गरीब तक भी शिक्षा पहुंच चुकी है। आज आप दुनिया के किसी भी हिस्‍से में जाइए। शिक्षा को लेकर एक वैश्विक जागरूकता का माहौल है। इसका असर भारत पर भी देखा जा सकता है। जो भी नई नीतियां बनती है, उनमें शिक्षा सबसे अहम मसला होती है। और जब भी आंकड़े प्रस्‍तुत करने होते हैं, उसमें भी शिक्षा प्रमुख बिंदु के रूप में सामने आती है। शिक्षा के स्‍वरूप को हमें वैश्विक संदर्भ में देखना होगा। हम जो शिक्षा प्रदान कर रहे है, वह किस तरह ग्रहण की जा रही है, उसकी सामाजिक उपादेयता किस प्रकार की है। उदाहरण के लिए आप किसी शिक्षित के बारे में यह नहीं कह सकते कि हां यह सिर्फ शिक्षित है। आपको यह जानना होगा कि उनकी शिक्षा का स्‍तर क्‍या है, उसने किस प्रकार की शिक्षा प्राप्‍त की है और स्‍कूलों, कॉलेजों, विश्‍वविद्यालयों में किस प्रकार की शिक्षा दी जा रही है।   
जब हम शिक्षितों की बात करेंगे तो फिर हमें उन्‍हें प्राथमिक, माध्‍यमिक और उच्‍च शिक्षा में बांटना होगा। प्राथमिक शिक्षा एक तरफ सरकारी संस्‍थानों से प्राइवेट संस्‍थानों की तरफ रूख करती चली जा रही है, वही दूसरी तरफ लगातार महंगी होती चली जा रही है। एक जमाना था जब केवल सरकारी स्‍कूल हुआ करते थे, ट्रस्‍ट स्‍कूल हुआ करते थे और बहुत थोड़े निजी शिक्षण संस्‍थाओं तक चुनिंदा अमीरों के बच्‍चे पहुंच पाते थे। आज गरीब, किसान, मजदूर भी अपने बच्‍चे को एक प्राइवेट स्‍कूल में पढ़ाना चाहता है क्‍योंकि सरकारी शिक्षण संस्‍थाओं का स्‍तर लगातार गिरा है।   

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