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Name Nandi Bhai Morena

created Sep 11th, 03:56 by 9755336418


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यह इतना अहम नहीं है कि पहलू खान के हत्‍यारे जिले की आदालत से इसलिए छूट गए कि अभियोजन (पुलिस) पर्याप्‍त सबूत नहीं जुटा पायी। चिंता यह है कि देश की सबसे बड़ी अदालत के बेहद प्रखर न्‍यामूर्ति जस्टिस चंद्रचूड़ ने मुंबई के एक सेमिनार में पहलू खान की हत्‍या के आरोपियों को छोड़े जाने का जिक्र करते हूए कहा, जज के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि उसके समक्ष जिस तरह के सबूत पेश किए जाते हैं उसी के मुताबिक फैसला करना होता है। अक्‍सर पूलिस की अयोग्‍ता के कारण या जान -बूझकर जांच अपर्याप्‍त होती है। यह भी देखा गया है कि कोर्ट की निगरानी में हुई जांच की गुणवता बेहतर होती है। एक जनमंच से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हूई जांच की गुणवता बेहतर होती है। एक जनमंच से सुप्रीम कोर्ट के जज की यह स्‍वीकारोक्त्‍िा बेहद चौंकाने वाली है। क्‍या देश के सेशंस कोर्ट जो हर संगीन मामले सुनते हैं, पुलिस जांच के मोहताज है यानी अगर दरोगा ने पैसे खा लिए हैं विधायकजी का प्रभाव है या कप्‍तान का इसारा है तो न्‍याय व्‍यवस्‍था पंगु हो जाती है क्‍या इस तरह की अदालतों को पिछले अनेक दशकों में अपने तमाम फैसलों में सुप्रीम कोर्ट ने स्‍पष्‍टरूप से नहीं कहा है कि अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 173 या 156 ट्रायल कोर्ट को यह अधिकार देता है कि पुनर्जांच या और जांच के आदेश दे। लालू यादव के केस में बरी किए जाने के कोर्ट के आदेश के खिलाफ जांच एजेंसी कुछ वर्षों तक अपील में इसलिए नहीं की गई कि केन्‍द्र राज्‍य में भी सरकार उनकी थी। मुजफ्फ्रनगर दंगे के सभी आरोपी हाल ही में आदालत ने छोड़ दिये वहीं साक्ष्‍य के आभाव में योगी की सरकार फैसले के लिखाफ अपील में इसलिए नहीं कर रही है जबकि इन दंगों में 65 लोगों की जाने गईं, घर जले औरा दुष्‍कर्म हुए राजस्‍थान सरकार पहलू खान के मामले में फिर जांच करवा रही है क्‍योंकि अब शासन में नई पार्टी है क्‍या न्‍याय अब इस बात पर तय होगा कि सत्‍ताधारी दल के बैलंसशीट में क्‍या
 दिखाई देता है स्रप्रीम कोर्ट ने ही न्‍याय की प्रक्रिया में महिमामंडित करते हुए धर्मपाल बनाम हरियाणा केस में कहा था।
 अगर जांच में कोई कोताही की जाती है तो वह न्‍याय की देवी को मूर्छित करना होगा। फिर अगर ट्रायल कोर्ट को फिर से जांच करने का अधिकार नहीं है तो न्‍याय कैसे मिलेगा अगर पुलिस ने जांच ठीक तरह से नहीं  की है तब क्‍या सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्‍छेद 142 के तहत  हासिल असीमित शक्तियों के बावजूद यह नयायिक मर्छा देखता रहेगा
 

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