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बंसोड टायपिंग इन्‍स्‍टीट्यूट शॉप नं. 42 आनंद हॉस्टिपटल के सामने, संचालक- सचिन बंसोड मो.नं.

created Wednesday October 09, 06:32 by shilpa ghorke


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एक मेहनती और ईमानदार नौजवान बहुत पैसे कमाना चाहता था क्‍योंकि वह गरीब था और बदहाली में जी रहा था। उसका सपना था कि वह मेहनत करके खूब पैसे कमाये ओर एक दिन अपने पैसे से एक कार खरीदे। जब भी वह कोई कार देखता तो उसे अपनी कार खरीदने का मन करता। कुछ साल बाद उसकी अच्‍छी नौकरी लग गयी। उसकी शादी भी हो गयी और कुछ ही वर्षो में वह एक बेटे का पिता भी बन गया। सब कुछ ठीक चल रहा था मगर फिर भी उसे एक दुख सताता था कि उसके पास उसकी अपनी कार नहीं थी। धीरे-धीरे उसने पैसे जोड़ कर एक कार खरीद ली। कार खरीदने का उसका सपना पूरा हो चुका था और इससे वह बहुत खुश था। वह कार की बहुत अच्‍छी तरह से देखभाल करता था और उसने शान से घूमता था। एक दिन रविवार को वह कार को रगड-रगड कर धो रहा था। यहां तक कि गाड़ी के टायरों को भी चमका रहा था। उसका 5 वर्षीय बेटा भी उसके साथ था। बेटा भी पिता के आगे पीछे घूम-घूम कर कार को साफ होते देख रहा था। कार धोते-धोते अचानक उस आदमी ने देखा कि उसका बेटा कार के बोनट पर किसी चीज से खुरच-खुरच कर कुछ लिख रहा है। यह देखते ही उसे बहुत गुस्‍सा आया। वह अपने बेटे को पीटने लगा। उसने उसे इतनी जोर से पीटा कि बेटे के हाथ की एक उंगली ही टूट गयी। दरअसल वह आदमी अपनी कार को बहुत चाहता था और वह बेटे की इस शरारत को बर्दाश्‍त नहीं कर सका। बाद में जब उसका गुस्‍सा कुछ कम हुआ तो उसने सोंचा की जा कर देखूं कि कार में कितनी खरोच लगी है। कार के पास जाकर देखने पर उसके होश उड़ गये। उसे खुद पर बहुत गुस्‍सा रहा था। वह फूट-फूट कर रोने लगा। कार पर उसके बेटे ने खुरच कर लिखा था- पापा आई लव यू.  

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