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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || CPCT_Admission_Open

created Oct 21st, 05:48 by Guru Khare


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जब समाज में अत्‍याचार, अनाचार अशान्ति, अज्ञान, अंध विश्‍वास और रूढ़ियां जड़ जमा लेती हैं, तब कोई कोई महापुरुष समाज में इन कुरीतियों को दूर करने के लिए जन्‍म लेता है। महात्‍मा गौतम बुद्ध भी ऐसे ही काल में पैदा हुए थे जब समाज में अनेक प्रकार की कुरीतियां अपना दुष्‍प्रभाव दिखा रही थीं। उन्‍होंने समाज में अहिंसा, प्रेम, त्‍याग और शांति का संदेश देकर इन कुरीतियों को दूर करने का प्रयत्‍न किया।
    महात्‍मा गौतम बुद्ध का जन्‍म 569 ई. पूर्व में कपिल वस्‍तु में हुआ था। इनके पिता का नाम शुद्धोधन और माता का नाम माया था। इनका जन्‍म लुम्बिनी नामक स्‍थान पर हुआ था। इनके जन्‍म के कुछ दिन बाद इनकी माता की मृत्‍यु हो गई थी। इसलिए इनका पालन पोषण इनकी सौतेली मां ने किया। वे अपने पिता की इकलौती संतान थे। इसलिए इनके पिता उनसे बहुत प्‍यार करते थे।
    बुद्ध बचपन से ही अन्‍य बालकों से भिन्‍न थे। प्राय: बच्‍चे नटखट और चंचल होते हैं। पर बुद्ध बचपन से ही शांति और गंभीर स्‍वभाव के थे। वे बहुत कम बोलते थे। एकांत में बैठना उन्‍हें अच्‍छा लगता था। वे सदा चिंतन में लगे रहते थे। महात्‍मा बुद्ध ज्‍यों-ज्‍यों बड़े होने लगे, त्‍यों-त्‍यों उनके स्‍वभाव में परिवर्तन आने लगा। सांसारिक सुखों में उन्‍हें कोई रूचि नहीं रही। हृदय में वैराग्‍य भाव पैदा होने लगा। पुत्र के इस स्‍वभाव को देखकर महाराजा शुद्धोधन को बहुत चिन्‍ता हुई। उन्‍होंने पुत्र बुद्ध को प्रसन्‍न रखने के लिए अनेक तरह के उपाय किये। उसे सुख साधन दिए, पर महात्‍मा बुद्ध को कोई भी वस्‍तु आकर्षित नहीं कर सकी। अत: पिता ने उनका विवाह बहुत सुंदर कन्‍या यशोधरा के साथ कर दिया। उनका विचार था कि बुद्ध का विवाह कर देने से उनके स्‍वभाव में परिवर्तन जायेगा। कुछ समय बाद उनके यहां एक पुत्र हुआ। इसका नाम राहुल रखा गया। महात्‍मा बुद्ध के मन में धीरे-धीरे परिवर्तन होने लगा। राजकुमार बुद्ध ने नगर में घूमने की इच्‍छा प्रकट की। नगर भ्रमण की उन्‍हें इजाजत मिल गई। राजा ने नगर के रक्षकों को संदेश दिया कि वे राजकुमार को सामने कोई भी ऐसा दृश्‍य लायें जिससे उनके मन में संसार के प्रति वैराग्‍य भावना पैदा हो। सिद्धार्थ नगर में घूमने गए। उन्‍होंने नगर में बूढ़े को देखा। उसे देखते ही उन्‍होंने सारथी से पूछा यह कौन है। इसकी यह दशा क्‍यों हुई है। सारथी ने कहा यह एक बूढ़ा आदमी है। बुढ़ापे में प्राय सभी आदमियों की यह हालत हो जाती है।
    सिद्धार्थ ने एक दिन रोगी को देखा। रोगी को देखकर उन्‍होंने सारथी से उसके बारे में पूछा। सारथी ने बताया यह रोगी है और रोग से मनुष्‍य की ऐसी हालत हो जाती है। इन घटनाओं के बाद वैराग्‍य भाव बढ़ गया। सांसारिक सुखों से उनका मन हट गया। उन्‍होंने जीवन के रहस्‍य को जानने के लिए संसार को छोड़ने का निश्‍चय किया। वे एक दिन रात को उठे। तब यशोधरा सो रही थी। उन्‍होंने अपनी पत्‍नी और पुत्र को बहुत समय तक देखा और उन्‍हें गहरी नींद में छोड़ चुपचाप घर से निकल कर चले गये।

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