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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || CPCT_Admission_Open

created Oct 21st, 06:20 by Vivek Sen


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भारत पर्वों का देश है। हर मौसम, हर अवसर, हर दिन, हर वर्ग और प्रदेश के लिए कुछ-न-कुछ विशेष है। कुछ पर्व तो ऐसे हैं जो राष्‍ट्रीय स्‍तर पर मनाये जाते हैं, पर कुछ ऐसे भी हैं जिन्‍हें प्रादेशिक स्‍तर पर मनाया जाता है। इन प्रादेशिक पर्वों के साथ उस विशेष प्रदेश कुछ मान्‍यताएं जुड़ी होती है वहां की स्‍थानीय संस्‍कृति का सामंजस्‍य होता है। प्रदेश चाहे जो भी हो पर्व चाहे जैसा भी हो इतना तो स्‍पष्‍ट रूप से कहा जा स‍कता है पर्वों का हमारे सामान्‍य जीवन में एक विशेष महत्‍व है। ये हमारे जीवन की सही तस्‍वीर प्रस्‍तुत करते हैं। हमारे आदर्शों, संस्‍कृतियों, संस्‍कारों, परम्‍पराओं को जीवित रखने में अहम् भूमिका निभाते हैं। ये हमें हमारे अतीत से हमारे आदर्शों से और हमारी विरासतों से जोड़े रखते हैं। हम कह सकते हैं कि ये पर्व हमारे प्राण हैं जो हमें जिन्‍दगी का अहसास दिलाते रहते हैं।  
    इन्‍हीं पर्वों की पंक्ति में एक नाम पोंगल का भी आता है। यूं तो यह तमिलनाडू प्रदेश का प्रमुख पर्व है परन्‍तु सही अर्थ में यह हमारे देश की सही तस्‍वीर पेश करता है। भारत एक कृषि प्रधान देश है और पोंगल मुख्‍य रूप से कृषि से ही जुड़ा है।  
    तमिलनाडू प्रदेश में सर्दियों में भी बारिश होती है। यह बारिश घान की फसल के लिए सर्वाधिक  लाभदयक सिद्ध होती है। चूंकि वर्षा के देवात इन्‍द्रदेव माने जाते हैं इसीलिए पर्व में इन्‍द्रदेव की पूजा की जाती है। इस पर्व का समय प्राय: जनवरी महीने का होता है। धान की फसल दिसम्‍बर के अन्‍त या जनवरी के प्रारम्‍भ तक तैयार हो जाती है फिर उसकी कटाई होती है। इसके बाद किसान मानसिक रूप से काफी उत्‍साहित और आहलादिल रहते हैं। इसी स्‍वतंत्र भरे दिनों में अपनी भावनाओं का भरपूर लाभ उठाने के लिए वे पोगल को त्‍योहार मनाते हैं।  
    यह पर्व कई चरणों में मनाया जाता है। काफी उत्‍साह एवं आनन्‍द का वातावरण होता है चारों ओर। पर्व का पहला दिन भोंगी पोंगल के रूप में मनाया जाता है इस दिन चावल का दलिया हर घर में पकाया जाता है। अपने सगे संबंधियों एवं मित्राें को आमन्त्रित किया जाता है। यह भोजन इन्‍द्रदेव के सम्‍मान में आयोजित किया जाता है। यहां ऐसी मान्‍यता है कि इन्‍द्र की कृपा से ही अच्‍छी बारिश होती है जो धान की फसल को जीवन प्रदान करती है। अत: इस भोज द्वारा इन्‍द्र का धन्‍यवाद ज्ञापन किया जाता है। चावल को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है। इस दिन चावल खाना शुभ माना जाता है। इसीलिए लोग चावल के भिन्‍न-भिन्‍न पकवान बनाते हैं खाते और खिलाते हैं।

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