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साँई टायपिंग इन्‍स्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा (म0प्र0) सीपीसीटी न्‍यू बैंच प्रारंभ संचालक- लकी श्रीवात्री मोबाईल नम्‍बर-9098909565

created Oct 21st, 14:35 by sandhya shrivatri


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एक बार की बात है जब हनुमान जी समुद्र पार करके सीता माता को खोजने के लिए लंका पहुंचे तब वे रावण के छोटे भाई विभीषण के पास गए। विभीषण ने हनुमान जी से एक छोटा सा प्रश्‍न किया कि प्रिय हनुमान क्‍या श्रीराम मेरे ऊपर कृपादृष्टि बनायेंगे रावण मेरे भ्राता हैं, क्‍या यह जानते हुए भी वो इस संसार से मुझे मुक्ति दिलायेंगे?
यह सुनते ही हनुमान जी बोल पड़े विभीषण महाराज आप संशय क्‍यों कर रहे हैं जब मुझ जैसे वानर कुल में पैदा हुए एक वानर को उन्‍होंने शरण दे दी, अपना दास स्‍वीकार कर लिया तब भला वे आपको क्‍यों नहीं अपनाएंगे, आप तो एक इंसान हैं, और आपके अंदर इतनी अच्‍छाइयां छिपी है, वो जरूर आपकी सहायता करेंगे।
 
इस प्रकार हनुमान जी ने ही अपनी भक्ति से विभीषण के मन में भी अटूट विश्‍वास पैदा कर दिया जिस कारण ही विभीषण, श्रीराम का साथ देने को पूर्ण रूप से तैयार हो गए।
 
मित्रो इस प्रसंग से आशय यह है कि जब आप अपने  जीवन को ईश्‍वर की भक्ति और सेवा में अर्पण कर देना चाहिए यदि हमारे अंदर भगवान के प्रति श्रद्धा और विश्‍वास है तो हम यही विश्‍वास दूसरों के अंदर भी पैदा कर सकते हैं।

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