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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || CPCT_Admission_Open

created Nov 8th, 09:43 by ddayal2004


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दिल्‍ली में साकेत के पास मोटरसाइकिल से वर्दी में जा रहे पुलिस के एक सिपाही को कुछ वकीलों द्वारा अनायास पीटने की घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो के अनुसार, सिपाही अकेला जा रहा था और वकील उसे पीट रहे थे। सिपाही ने सब्र रखना बेहतर समझा। सिपाही अकेला होता या उसके पास कोई हथियार होता तो हो सकता है कि तीसहजारी जैसी कोई घटना फिर घट जाती। इसमें दो राय नहीं कि वकील सत्‍ता के लिए एक दबाव समूह के रूप में पुलिस से अधिक उपयोगी हैं जबकि पुलिस सरकार का एक विभाग है नियम कानून से बंधा, हजार बंदिशें। दिल्‍ली पुलिस के जवानों के धरने को अनुशासनहीनता की दृष्टि से कुछ मित्र देख सकते हैं पर मेरी राय थोड़ी अलग है। अनुशासन का यह कतई अर्थ नहीं है कि अपनी बात कही ही जाए। इसका अर्थ यह भी है कि अपनी बात विभाग के आला अधिकारियों तक खुल कर कही जाए। जो आक्रोश अभिव्‍यक्‍त हो रहा है, उसका समाधान ढूंढा जाए। पुलिस विभाग को किसी फैक्‍ट्री या अन्‍य सरकारी विभागों की तरह देख कर समझने की कोशिश करेंगे तो नहीं समझ पाएंगे। इसे सेना या सशस्‍त्र बलों की तरह देख कर समझें। दिल्‍ली पुलिस में तीसहजारी अदालत के बाद उपजे असंतोष का बड़ा कारण यह है कि हाईकोर्ट ने बिना पुलिस का पक्ष जाने ही उनके साथियों का केवल तबादला कर दिया बल्कि कुछ को निलंबित भी कर दिया।

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