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बंसोड टायपिंग इन्‍स्‍टीट्यूट शॉप नं. 42 आनंद हॉस्पिटल के सामने, छिन्‍दवाड़ा (म0प्र0) संचालक- सचिन बंसोड मो.नं. 8982805777

created Nov 8th, 12:18 by shilpa ghorke


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अच्‍छी से अच्‍छी योजना भी बिना तैयारी के जमीन पर उतार दी जाए तो उसका क्‍या हश्र हो सकता है यह वस्‍तु एवं सेवाकर (जीएसटी) की स्थिति को देखकर समझा जा सकता है। कराधान प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव समझी जाने वाली जीएसटी योजना के लागू होने के दो साल बाद भी इसके साइड इफेक्‍ट से सरकार निकल नहीं पाई हैं। कर संग्रह लगातार कम होने की चिंता से निबटने के लिए पिछले दिनों केंद्र सरकार ने अधिकारियों की एक समिति को उपाय सुझाने की जिम्‍मेदारी सौपी थी। यह समिति अनाजों को भी जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार कर रही है। अभी ब्रांडेड अनाज पर ही जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार कर रही है। अभी ब्रांडेड अनाज पर ही जीएसटी है। पहले थोक व्‍यापारियों को अनाज खरीद पर परचेज टैक्‍स देना होता था, जिसे अब खत्‍म कर दिया गया हैं। थोक व्‍यापारी किसानों आढ़तियों से अनाज खरीदते है। खुले अनाज को सस्‍ता रखना भी एक उद्देश्‍य रहा होगा कि सरकार यह मानती भी रही है कि वह इस पर मुनाफा नहीं कमाना चाहती। लेकिन कम होते जीसएसटी संग्रह के कारण अब अनाज को भी जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार किया जा रहा है। हो सकता है कि सरकार का राजस्‍व इसके कुद बढ़ जाए, पर इससे होने वाली परेशानियों का क्‍या होगा ?  
समिति के सदस्‍यों का तर्क है कि कोई रजिस्‍टर्ड कंपनी गैर-रजिस्‍टर्ड कंपनी की तरफ से जीएसटी भर सकती है। इसके लिए रिवर्स चार्ज मैकेनिज्‍म जीएसटी दरों में बदलाव पर विचार किया जा रहा है। जीएसटी लागू करने के बाद इसमें कई बार बदलाव हो चुके हैं। यह सरकार की बदहवासी उजागर करता है और बताता है कि बिना पर्याप्‍त तैयारी या विचार-विमर्श के कराधान जैसे महत्‍वपूर्ण क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया गया। इसने देश के छोटे मध्‍यम कारोबारियों की कमर तोड़ दी। कर संग्रह का जो नुकसान हो रहा है वह अलग। इस साल अक्‍टूबर का जीएसटी संग्रह 95,380 करोड़ रुपए है जो बीते साल इसी माह के 1,00,710 करोड़ से काफी कम है। अब नवंबर के जीसएसटी संग्रह में संतोषजनक वृद्धि नहीं हुई तो सरकार को अन्‍य उपाय करने होंगे। कर संग्रह अर्थव्‍यवस्‍था की रीढ़ हैं। सरकार की चिंता वाजिब है, पर इसका समाधान खोजने से पहले उन बुनियादी संरचनाओं को मजबूत किया जाना बेहत जरूरी होगा, कि यह महंगाई पर किस तरह असर डालेगा? आर्थिक सुस्‍ती के कारण पहले से ही परेशान चल रहे निम्‍न आय वर्ग वाले परिवार अनाजों की महंगाई क्‍या झेल पाएंगे?  
 

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